पीएम मोदी के बाद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, हमें यह सोचना चाहिए कि क्या संविधान निर्माताओं ने जिन विचारों के साथ उच्च सदन का गठन किया था, हमें उसे साकार किया कि नहीं। सिंह ने राज्यों के अधिकार, नए राज्यों के गठन जैसे मामलों में राज्यसभा में ज्यादा प्रभावी चर्चा और ज्यादा समय देने की बात कही।
मनमोहन ने कहा, सरकार द्वारा राज्यसभा की अनदेखी कर जल्दबाजी में महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने से हमारे संस्थानों का कद एवं महत्व कम होता है। उन्होंने हाल ही में कार्यपालिका द्वारा धन विधेयक के प्रावधानों के दुरुपयोग की घटनाओं पर भी चिंता जताई। सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 110 के तहत लोकसभा को वित्तीय मामलों को लेकर विशेष प्रावधान है, लेकिन लोकसभा में वित्त विधेयक बताकर राज्यसभा को बाईपास और नजरअंदाज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष सुनिश्चित करे कि ऐसा दोबारा न हो क्योंकि इससे सदन की गरिमा कम होती है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में लोक महत्व और राज्यों से जुड़े शिक्षा व स्वास्थ्य विषयों पर अधिक समय तक चर्चा होनी चाहिए। सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दूसरे सदन को समान भागीदार के रूप में माना था वहीं आंबेडकर चेक एंड बैलेंस को देखते हुए ही दूसरे सदन की जरूरत समझी थी।