ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की खबर से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार बीजद और कांग्रेस के कम से कम पांच विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया है। इस घटनाक्रम ने चुनावी समीकरण को बदल दिया है और विपक्षी दलों के भीतर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा की चार सीटों के लिए मतदान के बीच यह मामला सामने आया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए इस बार ओडिशा में 12 साल बाद मतदान हो रहा है। दरअसल इस बार चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण चुनाव करवाना जरूरी हो गया। भाजपा की ओर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार उम्मीदवार हैं। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है।
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किन विधायकों ने किया क्रॉस वोटिंग का दावा?
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने दावा किया कि पार्टी के तीन विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया है। इनमें रमेश जेना, दसरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस का नाम शामिल है। वहीं बीजद के बांकी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को वोट दिया है।
राज्य कांग्रेस प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने कहा कि आज पैसे और सत्ता की ताकत जीत गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के तीन विधायकों ने अपना भविष्य बेच दिया है। लल्लू ने कहा कि कांग्रेस इन विधायकों को निलंबित करेगी और उनके खिलाफ विधानसभा स्पीकर के पास शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी।
बीजद विधायक ने क्रॉस वोटिंग क्यों की?
बीजद विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने कहा कि वह अपनी पार्टी के उस फैसले से सहमत नहीं हैं जिसमें कांग्रेस के साथ सहयोग की बात की गई थी। उन्होंने कहा कि उनका फैसला बीजू पटनायक की विरासत के अनुरूप है, जिन्होंने हमेशा कांग्रेस के खिलाफ राजनीति की थी। वहीं बीजद विधायक सौविक बिस्वाल की पत्नी ने भी दावा किया कि उनके पति ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर दिलीप रे को वोट दिया है।
नवीन पटनायक ने क्या आरोप लगाए?
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने इस मामले में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल हॉर्स ट्रेडिंग यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रहे हैं। पटनायक ने यह भी कहा कि जिन विपक्षी विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट दिया है, उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव का गणित क्या कहता है?
147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 14 और सीपीआई(एम) का एक विधायक है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 30 प्रथम वरीयता वोट जरूरी हैं। ऐसे में अतिरिक्त वोटों के कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना पहले से जताई जा रही थी।
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