राजस्थान की तरह भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में भी पेच फंसा दिया है। यहां चार सीटों पर चुनाव है। सीटों की दृष्टि से यहां भाजपा और कांग्रेस-जदएस को दो-दो सीटें मिलनी हैं। मगर चुनाव मैदान में निर्दलीय संगमेश चिकनकरगुंडा के उतरने से लड़ाई दिलचस्प हो गई है।
चर्चा है कि भाजपा ने ही संगमेश को मैदान में उतारा है। यहां एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 45 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा के पास 117 विधायक हैं। मतलब दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद उसके पास 27 अतिरिक्त वोट हैं।
ऐसे में अगर निर्दलीय उम्मीदवार ने 18 अतिरिक्त वोट जुटा लिए तो कांग्रेस-जदएस के लिए मुश्किल होगी। इससे बचने के लिए कांग्रेस की पहल पर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा को उम्मीदवार बनाया गया है। पहले भी कांग्रेस-जदएस के विधायक टूट चुके हैं।
भाजपा मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों को तोड़ कर पहले ही कांग्रेस को झटका दे चुकी है। ज्योतिरादित्य को उम्मीदवार बनाकर पार्टी यहां पहले ही दो सीट पक्की कर चुकी है। दूसरी तरफ गुजरात में भाजपा ने कांग्रेस की राह में रोड़े बिछा दिए हैं।
8 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अपने दम पर दो सीट जीतने की हैसियत खो चुकी है। इस राज्य में एक सीट जीतने के लिए 35.1 विधायकों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस के 8 विधायकों के इस्तीफे के बाद उसके विधायकों की संख्या 73 से घटकर 65 रह गई है।
जबकि भाजपा के पास 103 विधायक हैं। उसे तीन सीटें जीतने के लिए 106 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में सारा दारोमदार अब बीटीपी के दो, एक-एक एनसीपी और निर्दलीय विधायकों पर है। कांग्रेस के लिए मुश्किल यह है कि इन चार विधायकों के समर्थन के बावजूद उसका दूसरा उम्मीदवार सीधे तौर पर जीतने की स्थिति में नहीं है।