राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड और मध्यप्रदेश में क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है। पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद भाजपा ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस को अपने विधायकों के टूटने और क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। पिछली बार बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ा था। इस बार भी चुनाव में राजनीतिक रणनीति और विधायकों की निष्ठा अहम भूमिका निभा सकती है।
दस राज्यों की राज्यसभा की 24 सीटों पर होने जा रहे चुनाव पर एक बार फिर से क्रॉस वोटिंग के बादल मंडरा सकते हैं। दरअसल पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद भाजपा ने जहां झारखंड में उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है, वहीं पार्टी मध्यप्रदेश की सभी तीन सीटों पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
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गौरतलब है कि इसी साल मार्च महीने में भाजपा ने ओडिशा और बिहार में संख्या बल की कमी के बावजूद विपक्ष को झटका दिया था, जबकि हरियाणा में कांग्रेस हारते-हारते बची थी। झारखंड जहां दो सीटों पर चुनाव है, वहां भाजपा ने एक उम्मीदवार उतारने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। जहां तक संख्या बल की बात है तो यहां एक सीट पर जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 मत की जरूरत है। झामुमो, कांग्रेस, माले और राजद मिला कर विपक्षी गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने केलिए ठीक 58 विधायक हैं।
भाजपा के पास 24 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अगर विपक्षी खेमे के चार विधायक टूटे तो भाजपा की राह आसान हो जाएगी। मध्यप्रदेश में जहां तीन सीटों पर चुनाव है, वहां एक सीट केलिए 58 विधायकों का वोट चाहिए। कांग्रेस को 62 विधायकों का समर्थन हासिल है। दूसरी ओर भाजपा के पास दो सीटें जीतने के बाद 48 अतिरिक्त मत बचेंगे। यहां भी अगर कांग्रेस के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की तो भाजपा तीसरी सीट पर भी बाजी मार सकती है। राज्य में पिछली बार हुए राज्यसभा चुनाव में वर्तमान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में कांग्रेस में बड़ा पालाबदल हुआ था।
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राज्य
कुल सीटें
भाजपा की स्थिति
विपक्ष की स्थिति
झारखंड
2
24 विधायक समर्थन
गठबंधन के 58 विधायक
मध्यप्रदेश
3
2 सीटें लगभग तय
कांग्रेस के पास 62 विधायक
फिर दांव पर कांग्रेस विधायकों की निष्ठा
बीते चुनाव की तरह इस चुनाव में भी कांग्रेस विधायकों की निष्ठा की परीक्षा होगी। बीते चुनाव में बिहार में कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान से दूरी बना कर तो ओडिशा में तीन विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार का समर्थन कर विपक्ष को झटका दिया था। हरियाणा में भी पार्टी के नौ विधायकों ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था। हालांकि राज्य में पांच वोटों के अवैध घोषित होने के कारण कांग्रेस उम्मीदवार को बमुश्किल जीत हासिल हुई थी।
यथास्थिति में राजग को दो सीटों का लाभ
अगर चुनाव क्रॉस वोटिंग से अछूता रहा तब भी राजग को 17 सीटों के साथ दो सीटों का लाभ होगा। इसमें सर्वाधिक लाभ पार्टी की सहयोगी टीडीपी को और सर्वाधिक घाटा वाईएसआर कांग्रेस को होगा। कांग्रेस को कर्नाटक में लाभ होगा, मगर गुजरात में पार्टी का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा। हालांकि पार्टी को तमिलनाडु में एक सीट नई सहयोगी टीवीके के तोहफेसे मिलेगी। टीवीके ने अन्नाद्रमुक के सीवी शणमुगम के विधायक बनने से खाली हुई सीट कांग्रेस को देने का संकेत दिया है। कर्नाटक में भाजपा पूर्व पीएम देवगौड़ा को समर्थन देगी।