15 राज्यों की 57 सीटों के लिए मंगलवार से अधिसूचना जारी होने के साथ ही राज्यसभा चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई। लेकिन सवाल सबसे बड़ा यही है कि देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत अन्य राजनीतिक दलों से कौन उम्मीदवार उच्च सदन में पहुंचेंगे। सबसे ज्यादा कयास कांग्रेस पार्टी को लेकर के लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि कांग्रेस से प्रियंका गांधी को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा जा सकता है। दरअसल कर्नाटक राज्य कांग्रेस के लिए हमेशा से खेवनहार के रूप में आगे आता रहा है। इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी तक को इस राज्य ने आगे बढ़ने के लिए राजनीतिक गलियारा दिया है।
कांग्रेस खेमे में चर्चाएं इस बात की हैं कि 10 जून को होने वाले राज्यसभा के चुनावों में प्रियंका गांधी को कर्नाटक से उम्मीदवार बनाकर उच्च सदन में भेजा जाए। प्रियंका गांधी को राज्यसभा में भेजने की हिमायत करने वाले कर्नाटक के ही एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि कांग्रेस जब-जब डूबती हुई नाव बनी है तब तक इसी राज्य ने उसे सहारा दिया है। राजनैतिक विश्लेषक और कांग्रेस पार्टी को बहुत लंबे समय से करीब से जानने वाले ओपी मिश्र कहते हैं कि जब इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की नैया पूरी तरीके से डूब चुकी थी, तो इंदिरा गांधी को कर्नाटक के चिकमंगलूर से ही ऑक्सिजन मिली और उसके बाद पार्टी इमरजेंसी के दंश से बाहर उभरने लगी। इसी तरीके से राजीव गांधी की हत्या के बाद जब राजनीति में सक्रिय रूप से सोनिया गांधी चुनावी मैदान में आई, तो उत्तर प्रदेश के हालात बहुत बेहतर नहीं थे। तय योजना के मुताबिक एक बार फिर से कांग्रेस और गांधी परिवार ने कर्नाटक की राह चुनी और उन्हें बेलारी से चुनाव लड़ाया गया। यह वह दौर था जब सोनिया गांधी को विदेशी बहू के तौर पर देश भर में विरोधी पार्टियां सिर्फ नकार रही थीं, बल्कि सुषमा स्वराज जैसी कद्दावर भाजपा नेता को बेल्लारी से चुनावी मैदान में भी उतार दिया गया था। उस दौर में भी सोनिया गांधी बेल्लारी को जीतकर कांग्रेस को एक नई दिशा की ओर ऊपर ले जाने के लिए राजनीति के तटीय मैदान में आ चुकी थी।
कर्नाटक कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि अपने इसी इतिहास को देखते हुए पार्टी को प्रियंका गांधी जैसी नेता को कर्नाटक से एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारना चाहिए। भले ही यह चुनाव राज्यसभा का हो, लेकिन कांग्रेस की जब-जब नैया डूबी है तब-तब कर्नाटक ने ही उसे पार लगाया है। कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि टोटका मान कर प्रियंका गांधी को एक बार कर्नाटक से राज्यसभा में आना चाहिए संभव है कि इंदिरा और सोनिया के बाद प्रियंका गांधी कांग्रेस को ऑक्सिजन देकर उसको एक नए मुकाम तक ले जा सके। प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ाने के लिए कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी लगातार आलाकमान पर दबाव बनाए हुए हैं। हालांकि यह बात अलग है कि अभी तक पार्टी की ओर से इस बारे में कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। दरअसल कर्नाटक की चाबी राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। चुनावी समीकरणों के मुताबिक दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस को मिलनी तय है। जबकि एक सीट पर राजनीतिक रस्साकशी हो सकती है। कमरे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ सोनिया गांधी की राज्यसभा की उम्मीदवारी को लेकर के चर्चा भी हुई है।
राज्यसभा के चुनाव की चर्चा सिर्फ कांग्रेस के लिए ही नहीं हो रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार के भी चुनावी समीकरण को देखते हुए चर्चाओं का बाजार गर्म है। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में चर्चा समाजवादी पार्टी के नेताओं की हो रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों के मुताबिक समाजवादी पार्टी तीन लोगों को राज्यसभा भेज सकती है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा राज्यसभा के सदस्य के तौर पर जिस नाम की हो रही है, वह कांग्रेस के कद्दावर नेता कपिल सिब्बल हैं। हालांकि इसे लेकर आधिकारिक तौर पर न तो समाजवादी पार्टी की ओर से कोई पुष्टि की गई है और न ही कपिल सिब्बल की ओर से ऐसा कुछ इशारा स्पष्ट रूप से किया गया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा के लिए जो नाम आगे चल रहे हैं, उसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मु्ख्य सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आलोक रंजन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा के चुनावों में आलोक रंजन ने जिस तरीके से समाजवादी पार्टी में अपनी भूमिका निभाई है वह उनके राज्यसभा जाने की सबसे बड़ी सिफारिश करती है। चर्चाओं के मुताबिक समाजवादी पार्टी में सलीम शेरवानी और जयंत चौधरी का भी नाम आगे चल रहा है। हालांकि समाजवादी पार्टी में दो दर्जन बड़े नेता ऐसे हैं, जो राज्यसभा जाने के लिए अपने सभी राजनैतिक दांव-पेंच लगाकर उच्च सदन की ओर रुख करना चाहते हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी की ओर से फिलहाल ग्रीन सिग्नल किसी को नहीं मिला है।
राज्यसभा के लिए दिलचस्प मामला तो बिहार से बना हुआ है। बीते कुछ महीनों से लगातार चर्चा बनी हुई है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए दावेदारी ठोक सकते हैं। हालांकि इसे लेकर के अभी तक जेडीयू ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश में चर्चाएं तो यह भी हैं कि क्या इस बार केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार की राजनीतिक में इस पूरी उठापटक को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जाएगा। बिहार में चर्चाएं इस बात की भी हैं कि हाल में ही वीआरएस लेने वाले आईएएस मनीष वर्मा को राज्यसभा भेजा जा सकता है। इसके अलावा बिहार में एक नाम और चर्चा में है, वह इंजीनियर सुनील का है। जेडीए से जुड़े नेताओं का मानना है कि इंजीनियर सुनील मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी भी हैं और उन्हें लगातार राजनैतिक रूप से मजबूत करने के लिए अपनी योजनाओं पर भी अमल करते रहते हैं। हालांकि जेडीयू ने अनिल हेगड़े को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी है।