राज्यसभा सूत्रों के मुताबिक मार्शल की यूनिफॉर्म में अंतिम परिवर्तन साल 1950 में हुआ था, तब से अब तक यह पहला बदलाव है। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के मीडिया सलाहकार एए राव ने बताया, कोई बदलाव किए हुए लंबा समय बीत गया था, इसलिए उपराष्ट्रपति ने सोचा कि हमें यह अब करना चाहिए।
कौन होते हैं मार्शल और क्या है इनका काम
स्पीकर के बाएं ओर खड़ा व्यक्ति मार्शल होता है और दूसरा व्यक्ति डिप्टी मार्शल। लोगों को लगता होगा कि इनका काम चेयर के आदेश पर उपद्रवी सदस्यों को बाहर करना और उपद्रव के दौरान किसी को स्पीकर तक पहुंचने से रोकना होता है। अगर आप भी यही समझते हैं तो आप भी गलत हैं।
दरअसल, ये मार्शल सदन चलाने में स्पीकर की मदद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका चयन भी एक कठिन प्रक्रिया द्वारा होता है जिसमें संसद के नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर इनके ज्ञान को परखा जाता है। तो सवाल यह है कि असल में सांसदों को बाहर कौन ले जाता है? यह काम मार्शलों का नहीं बल्कि वार्ड अधिकारियों का है।