राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने संसद सदस्यों से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पर्चियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने सभी सांसदों से आपस में न्यूनतम संपर्क रखने, संक्रमण से बचाव के लिए ऐहतियातन मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सदस्य अपने आसपास सफाई का ध्यान रखे और स्वास्थ्यवर्धक भोजन लें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। उन्होंने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे एक दूसरे के संपर्क में आने से बचने के लिए पर्चियों का इस्तेमाल करें। स्कूल में परीक्षा हाल में पर्चियां नहीं चलती लेकिन सदन में चलेंगी।
उन्होंने सलाह दी कि वे कोरोना सुरक्षा उपायों के मद्देनजर राज्यसभा में एक दूसरे के संपर्क से बचने और बैठक के दौरान किसी भी तरह से स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों के पास आने के बजाए पर्ची से काम चलाएं। सदस्यों को एक दूसरे की सीट पर भी न जाने की सलाह दी और कहा अगर जरूरी हो तो स्लिप से काम चलाएं।
उन्होंने कहा कि वह सदस्यों से उम्मीद करते हैं कि वे टेबल कार्यालय तक नहीं आएंगे। साथ वे अन्य सदस्यों की सीट पर झुककर कान में बात नहीं करेंगे। कृपया इससे बचें, यह संक्रमण से बचाव में हमारी समझदारी का परिचायक है। सभापति की टिप्पणी पर पूरे सदन में ठहाके भी गूंजे।
एक सांसद ने उनसे मजाक में पूछा कि क्या एक कप चाय पीने के लिए आ सकते हैं। इस पर नायडू ने कहा कि वह अनौपचारिक रूप से पर्चियां भेज दें, वह इस मसले को संबोधित करने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने सभी सांसदों को सभापति कार्यालय में भी नहीं आने की सलाह दी और कहा कि उन्हें लोगों से मिलना अच्छा लगता है, लेकिन मौजूदा हालातों में स्थितियां इसकी इजाजत नहीं देते, इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
सदन में उठा ओबीसी जनगणना का मुद्दा
राज्यसभा में महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने शून्यकाल में ओबीसी जनगणना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई सालों से यह मांग की जा रही है। उन्हें याद है कि लोकसभा में दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने भी बहुत जोरदारी के साथ इस मुद्दे को उठाया था।
उन्होंने कहा कि जब जानवरों, पेड़ों की गणना सरकार करा सकती है तो समाज के इस महत्वपूर्ण घटक की अनदेखी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि वह ओबीसी की जनगणना 2018 में कराएगी।
इसके बाद 2019 में बताया गया कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। पर अभी जो जनगणना की जा रही है, उसमें से ओबीसी का कॉलम ही हटा दिया गया है। इसलिए वह सदन से अनुरोध करते हैं कि अगर पिछड़ा वर्ग को सही मायने में आगे बढ़ने का मौका देना चाहते हैं, इनके विकास के लिए योजनाएं बनाना चाहते हैं तो पिछड़ों की अलग से जनगणना होना अत्यंत आवश्यक है।
इससे पता लग सकेगा कि उन्हें कितना लाभ मिला और कितना मिलना चाहिए। इसलिए वह सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह ओबीसी जनगणना के लिए तुरंत प्रभाव से कदम उठाए।
मखाना उत्पादों की मांग अगले तीन सालों में 25-40 फीसदी बढ़ सकती है : तोमर
खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में बताया कि मखाना के वैल्यू एडेउ उत्पादों की मांग में अगले तीन सालों में 25-40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि भारत, चीन, जापान और थाईलैंड जैसे देशों में मखाना उत्पाद बहुत ही लोकप्रिय हैं। मखाना उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत बिहार के छह जिलों अररिया, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सहरसा और सुपौल की पहचान की है।