कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता खरगे को पीठासीन अधिकारी घनश्याम तिवारी ने बोलने की अनुमति दी, लेकिन कांग्रेस नेता को आगाह भी किया कि उन्हें कोई भी ऐसा मामला नहीं उठाना चाहिए, जो न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने एसआईआर पर बहस की मांग उठाने की कोशिश की।
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले पर चर्चा की मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच संसद में गतिरोध जारी है। मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि सदन की कार्यवाही से हटाए गए भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। इस पर राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी ने कहा कि सदन की कार्यवाही से हटाए गए अंश के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं किए जाने चाहिए।
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विपक्ष ने एसआईआर के मुद्दे पर किया हंगामा
सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू होने के तुरंत बाद एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। भोजनावकाश के बाद जब जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 सदन के पटल पर रखा गया और उसपर चर्चा शुरू हुई। लेकिन विपक्षी सांसदों ने एसआईआर के मुद्दे पर बहस की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान विपक्ष के नेता खरगे को पीठासीन अधिकारी घनश्याम तिवारी ने बोलने की अनुमति दी, लेकिन कांग्रेस नेता को आगाह भी किया कि उन्हें कोई भी ऐसा मामला नहीं उठाना चाहिए, जो न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने एसआईआर पर बहस की मांग उठाने की कोशिश की, लेकिन सभापति ने कहा कि यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा क्योंकि यह कार्य से संबंधित नहीं है। इस पर विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया।
भाजपा सांसद ने उठाया सवाल
जब विधेयक सदन के पटल पर रखा गया तो तभी भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने सवाल उठाया और कहा कि कार्यवाही के वीडियो, जिनमें वे अंश भी शामिल हैं जो रिकॉर्ड में नहीं हैं, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने देखा है कि जब भी कोई बहस शुरू होती है, विपक्ष के नेता खड़े होते हैं, आप विधेयक पर बोलने की अनुमति देते हैं, आप निर्देश देते हैं कि यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा। लेकिन फिर हम देखते हैं कि उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया जाता है।' उन्होंने कहा, 'जब लिखित रूप से वीडियो को हटा दिया गया है, तो उसे सोशल मीडिया पर कैसे पोस्ट किया जा सकता है, क्या यह विशेषाधिकार का हनन नहीं है?'
इसके बाद पीठासीन अधिकारी के पद पर आसीन घनश्याम तिवारी ने कहा कि जो कुछ भी सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया है, उसे सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि जो कुछ भी सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं है, वह संसद टीवी या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर न जाए।'