हिटलर को दुनिया एक तानाशाह के रूप में जानती है। खुद जर्मनी के लोग भी उसे अपने एक बुरे अतीत के रूप में याद करते हैं, लेकिन भारतीय नेताओं को रह-रहकर हिटलर की याद आती रहती है। इसी क्रम में भाजपा सांसद राकेश सिन्हा को भी संसद में बोलते हुए हिटलर की याद आ गई और इशारों-इशारों में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में गैर भाजपाई दलों की राजनीति को 'हिटलरशाही' करार दे दिया।
उन्होंने ऐसा तब किया जब राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर के बजट पर चर्चा हो रही थी। भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने विपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों के खत्म होने से पहले लोकतंत्र के नाम पर कुछ विशेष परिवार के लोगों की ‘तानाशाही’ चल रही थी।
उन्होंने कहा कि हिटलर और स्टालिन जैसे लोग भी लोकतंत्र के नाम पर चुनकर सत्ता में आते थे, लेकिन वह लोकतंत्र नहीं था। लोकतंत्र वह होता है जिसके माध्यम से आम आदमी की ताकत में बढ़ोतरी की जाती थी, जबकि विपक्ष के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर के लोगों के जनजीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों का जवाब देते हुए सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों की समाप्ति के बाद वहां बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव हो रहे हैं। किसानों से लेकर समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों को खूब लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी तक जम्मू-कश्मीर के ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय को देश के अन्य हिस्सों की तरह आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा था। जम्मू-कश्मीर के आठ लाख दिव्यांग लोगों को केंद्र सरकार की विशेष योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था क्योंकि केंद्रीय कानून वहां लागू नहीं हो पा रहे थे। लेकिन पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों के उन्मूलन के बाद वहां के लोगों को ये सभी लाभ मिलने लगे हैं।