रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को सिक्किम के नाथू ला सीमा के पास शेरेथांग पहुंचे। वह शेरेथांग युद्ध स्मारक पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे और क्षेत्र में तैनात रक्षा कर्मियों से बातचीत करेंगे। यह स्मारक 1967 के नाथू ला और चो ला संघर्षों के वीरों की याद में 2008 में बनाया गया था।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को सिक्किम में नाथू ला सीमा के पास स्थित शेरेथांग पहुंचे। यहां वह वीर जवानों को श्रद्धांजलि देंगे। अधिकारियों के मुताबिक, अपनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह इस क्षेत्र में तैनात रक्षा कर्मियों से भी बातचीत करेंगे। रक्षा मंत्री पूर्वी सिक्किम स्थित शेरेथांग युद्ध स्मारक पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
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शेराथांग युद्ध स्मारक में भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी इसी उत्साह और समर्पण के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते रहेंगे। मैं ईश्वर से आपके उज्ज्वल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं। ईश्वर आपको और आपके परिवारों को सुख-समृद्धि प्रदान करें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं एक बार फिर आपको और आपके परिवार के सदस्यों को दिल से दीवाली की बधाई देता हूं।'
क्यों खास है यह दौरा?
शेरेथांग युद्ध स्मारक पूर्वी सिक्किम में नाथू ला के पास स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 2008 में किया गया था। यह स्मारक 1967 में चीनी सेना के साथ हुए नाथू ला और चो ला संघर्षों में जान गंवाने वाले वीर जवानों के सम्मान में बनाया गया था। इसके अलावा, आजादी के बाद हुए अन्य संघर्षों में शहीद हुए सैनिकों को भी इस स्मारक के माध्यम से सम्मानित किया जाता है।
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इसके पहले दीवाली की पूर्व संध्या पर सुकना मिलिट्री स्टेशन पर रक्षामंत्री पहुंचे थे। इसकी जानकारी अपने एक्स हैंडल के माध्यम से साझा करते हुए उन्होंने लिखा, 'हमारे बहादुर सैनिकों के साथ पारंपरिक 'बड़ा खाना' में शामिल होने का मुझे सौभाग्य मिला। यह आयोजन एकजुटता का एक सच्चा उत्सव है, जहां पद और रैंक का अंतर मिट जाता है और हम सब एक परिवार की तरह साथ बैठते हैं।
उन्होंने लिखा 'पूर्वोत्तर भारत का कोई सुदूर छोर नहीं, बल्कि एक शानदार शुरुआत है। यह वह पहला क्षेत्र है जहां सबसे पहले सूर्योदय होता है और दिन की पहली किरण पहुंचती है। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने परिवारों और अपनों से दूर तैनात हमारे बहादुर सैनिकों के साथ भोजन करना और समय बिताना, हमेशा एक अत्यंत भावुक और विनम्र कर देने वाला अनुभव होता है। उनके आपसी भाईचारे और स्नेहपूर्ण मुस्कान में, हमारे सशस्त्र बलों की वास्तविक शक्ति और एकता की झलक मिलती है।' हमारे सैनिकों का अदम्य साहस, सर्वोच्च समर्पण और ऊंचा मनोबल ही पूरे देश को यह विश्वास दिलाता है कि हम शांति और सुरक्षा के साथ त्योहार मना सकें। भारत माता के इन वीर सपूतों को मेरा नमन!