अमेरिकी रक्षा विभाग और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने द्विपक्षीय, नॉन बाइडिंग सिक्योरिटी ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट समझौते पर दस्तखत किए। अमेरिका की तरफ से रक्षा के प्रधान उप सहायक सचिव डॉ. विक रामदास और भारत की तरफ से अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) समीर कुमार सिन्हा ने हस्ताक्षर किए। अमेरिकी रक्षा विभाग विभाग के मुताबिक, दोनों देशों के बीच SOSA पर हस्ताक्षर होने से दोनों देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधनों को की सप्लाई में एक-दूसरे को प्राथमिकता देंगे।
इस मौके पर रक्षा के प्रधान उप सहायक सचिव डॉ. विक रामदास ने कहा कि सिक्योरिटी ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा। साथ ही यह अमेरिका-भारत रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डीटीटीआई) को मजबूत करने में एक प्रमुख कारक साबित होगा।
क्या है SOSA?
सोसा पर दस्तखत होने से दोनों देशों को राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अप्रत्याशित आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों को हल करने के लिए एक दूसरे से आवश्यक औद्योगिक संसाधन प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी। सोसा के तहत दोनों देश डिफेंस के लिए जरूरी सामान की सप्लाई के लिए एक-दूसरे को प्राथमिकता देंगे। वहीं, सोसा पर हस्ताक्षर ऐसे वक्त में हुए हैं, जब यूक्रेन-रूस युदेध के चलते पूरी दुनिया में सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। जिसके प्रभाव से भारत भी अछूता नहीं रहा है। भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू फाइटर जेट एलसीए तेजस एमके-1ए में अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के जीई-404 इंजन लगाए जाने हैं। लेकिन वक्त में सप्लाई न होने के चलते भारतीय वायुसेना को अभी तक एक भी तेजस एमके-1ए की डिलीवरी नहीं हो पाई है। माना जा रहा है कि सोसा पर दस्तखत होने के बाद इंजन की डिलीवरी में तेजी आएगी। तेजस को जीई-404 इंजन सितंबर तक मिलने की उम्मीद है।
वहीं, भारत अमेरिका का 18वां SOSA साझेदार है। अन्य SOSA साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, इजरायल, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन के साथ राजनाथ सिंह की बातचीत के दौरान भारत की 31 एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन खरीदने की योजना, स्ट्राइकर इन्फैंट्री लड़ाकू वाहनों के प्रस्तावित संयुक्त विनिर्माण और भारत में जीई एफ414 इंजन के सह-उत्पादन पर भी प्रमुखता से चर्चा होने की संभावना है।
क्या है लाइजनिंग अफसरों का समझौता?
राजनाथ सिंह के अमेरिका दौरे के दौरान एक दूसरा समझौता भी हुआ है। यह है कि दोनों देशों के बीच संपर्क अधिकारियों (लाइजनिंग अफसरों) की नियुक्ति। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने इस बात पर गौर किया था कि एक-दूसरे के सैन्य संगठनों में सूचना साझा करना और संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करना महत्वपूर्ण है। जिससे संयुक्त सेवा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में समझौता ज्ञापन पर रक्षा मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग विभाग के संयुक्त सचिव विश्वेश नेगी और भारत-प्रशांत सुरक्षा मामलों के लिए सहायक रक्षा सचिव डॉ. एली रैटनर ने हस्ताक्षर किए।