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तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू के 10 साल: बर्फीली चोटियों पर देवदूत बनकर उभरे जांबाज, राजनाथ सिंह ने जमकर की सराहना

Fri, 08 May 2026 11:20 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सीमाओं पर तैनात प्रहरियों के लिए टीएमआर के जवान किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं हैं। शून्य से नीचे के तापमान और जानलेवा बर्फीले तूफानों के बीच इनका निस्वार्थ सेवा भाव ही भारत की असली शक्ति और गौरव है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इन जाबांजों की तारीफ की है। उन्होंने क्या-क्या कहा? खबर में जानिए...
 
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू (टीएमआर) के सेवा भाव की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक सीमाओं पर भीषण चुनौतियों का सामना करते हैं। लेकिन दुर्गम पहाड़ियों में इन सैनिकों की सुरक्षा कई बार उन पर्वतारोही बचावकर्मियों के हाथ में होती है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बचाते हैं। राजनाथ सिंह दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक फोटो प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। यह प्रदर्शनी 'राष्ट्र की एक दशक की मूक सेवा' विषय पर आधारित थी। टीएमआर ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अपनी सेवा के 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर रक्षा मंत्री ने संगठन के साहस और अनुशासन को सलाम किया।
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प्रतिकूल परिस्थितियों में अटूट साहस
संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा पर डटे जवानों के लिए कभी-कभी प्रकृति भी विपरीत खड़ी हो जाती है। ऐसी विषम परिस्थितियों में ये रेस्क्यूर्स अपनी जान की परवाह किए बिना आगे आते हैं। वे जवानों को सुरक्षित वापस लाते हैं। इससे न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि पहाड़ों में रहने वाले स्थानीय लोगों को भी सुरक्षा का अहसास होता है।

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मशीनों से बड़ा मानवीय कर्तव्य
रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक और मशीनें सहायता तो कर सकती हैं, लेकिन जीवन बचाने के लिए कर्तव्य की गहरी भावना होनी चाहिए। टीएमआर ने बार-बार साबित किया है कि वे इस भावना के सच्चे संरक्षक हैं। यह संगठन न केवल बचाव अभियान चलाता है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सीमा की स्थिरता और राष्ट्रीय लचीलेपन को भी मजबूत कर रहा है।

ऐतिहासिक अभियानों का गवाह
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, टीएमआर ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी आपदाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें 2022 का मणिपुर लैंडस्लाइड, 2023 की सिक्किम बाढ़ और 2024 की वायनाड आपदा शामिल है। हाल ही में 2025 में धराली की बाढ़ में भी इनकी भूमिका अहम रही। संगठन ने 1968 के एएन-12 विमान दुर्घटना के अवशेषों को खोजने जैसे जटिल मिशनों को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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