सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सबसे पहले उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी बात की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का समग्र राजनीतिक-सैन्य मकसद प्रॉक्सी युद्ध लड़ रहे पाकिस्तान को सजा देना था। आगे उन्होंने बताया शुरुआत पाकिस्तान में वर्षों से पाले जा रहे आतंक के अड्डों को खत्म करने के लिए की गई थी। यह कोई युद्ध नहीं था बल्कि प्रॉक्सी वॉर का जवाब था, ताकि दुश्मन को उसकी ही जुबान में जवाब दिया जा सके।
रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर इसलिए रोका गया क्योंकि भारत ने अपने सभी निर्धारित सैन्य-राजनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिए थे। उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि भारत ने किसी दबाव में ऑपरेशन रोका। राजनाथ सिंह ने कहा कि10 मई की सुबह जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरबेस पर हमला किया, तो पाकिस्तान ने हार स्वीकार की और हमारे डीजीएमओ से संपर्क कर कहा, महाराज, अब रुक जाइए।
पाकिस्तान की सैन्य ताकत और मनोबल की हार
राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की हार केवल युद्ध के मैदान में नहीं हुई, बल्कि यह उसकी सैन्य क्षमता और मनोबल दोनों की करारी शिकस्त थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने खुद भारत से अनुरोध किया कि कार्रवाई रोकी जाए। इस वार्ता के बाद फैसला हुआ कि ऑपरेशन को स्थगित किया जाए, लेकिन यदि पाकिस्तान की ओर से दोबारा कोई हरकत होती है तो यह ऑपरेशन फिर शुरू होगा।
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पाकिस्तान की नीति है आतंकवाद का इस्तेमाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद कोई मानसिक असंतुलन नहीं, बल्कि एक सोची समझी साजिश है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आतंकवाद नहीं, बल्कि एक रणनीतिक टूलकिट है जिसे पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत ने इस बार चुप नहीं रहकर निर्णायक कार्रवाई की और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंक के अड्डों को निशाना बनाया गया।
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140 करोड़ भारतीयों ने सेना की बहादुरी देखी
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की 140 करोड़ जनता ने भारतीय सेना के साहस को प्रत्यक्ष देखा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत के आत्मसम्मान, संप्रभुता और जनता के विश्वास की जीत थी।
विपक्ष के सवालों पर जताई आपत्ति
रक्षा मंत्री ने विपक्ष की उस मांग पर आपत्ति जताई जिसमें पूछा गया कि भारत के कितने विमान गिराए गए। उन्होंने कहा कि यह सवाल देश की भावनाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने पूछा कि विपक्ष ने कभी यह क्यों नहीं पूछा कि कितने दुश्मन के विमान गिराए गए। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य बड़ा होता है, तो छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
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राजनीति नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है
राजनाथ सिंह ने कहा कि वे चार दशक से राजनीति में हैं लेकिन कभी राष्ट्रहित से ऊपर राजनीति नहीं की। उन्होंने 1962 के चीन युद्ध और 1971 के पाकिस्तान युद्ध की याद दिलाते हुए कहा कि विपक्ष को जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए। जब देश हार रहा था, तब भी विपक्ष ने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने कहा कि हमें परीक्षा का परिणाम देखना चाहिए, यह नहीं कि परीक्षा में बच्चे की पेंसिल टूटी या नहीं।