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किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़, कुछ ताकतें उन्हें भ्रमित कर रहीं हैं : राजनाथ 

Wed, 30 Dec 2020 10:18 AM IST
संजीव कुमार झा एएनआई, नई दिल्ली

सार

  • रक्षामंत्री ने कहा, आंदोलन कर रहे किसानों को नक्सली या खालिस्तानी कहना गलत 
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किसानों का आंदोलन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किसानों को अन्नदाता और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा, कृषि कानून किसानों के हित में बनाए गए हैं। कुछ ताकतें किसानों के बीच भ्रम पैदा करने में जुटी हैं। आंदोलन कर रहे किसानों को दो साल तक इनका क्रियान्वयन देखना चाहिए।

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राजनाथ ने बुधवार को कहा, किसान अन्नदाता हैं। उनके खिलाफ नक्सल व खालिस्तानी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना गलत है। किसी को भी उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगाने की इजाजत नहीं है। सरकार किसान आंदोलन से दुखी है। संकट के समय किसानों ने अर्थव्यवस्था को मुश्किल से बाहर निकाला। वे हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्होंने कई मौकों पर देश को मुसीबत बाहर निकाला है।

किसानों से अनुरोध है कि वह कानूनों पर तर्क वार चर्चा करें और सिर्फ हां या न में जवाब नहीं मांगना चाहिए। अगर सरकार को लगेगा कि किसानाें के हितों के कुछ खिलाफ है तो उनकी समस्याओं को दूर करने को तैयार हैं। मैंने खुद कानून देखा है और मैं किसानों से अनुरोध करता हूं कि दो साल तक प्रायोगिक तौर पर कानूनों का क्रियान्वयन होने दें।  सरकार किसानों की आय दोगुनी करने को प्रयासरत है। सरकार बार-बार कह रही है कि एमएसपी जारी रहेगी। हम वादे से कैसे मुकर सकते हैं? लोकतंत्र में अगर नेता वादों से मुकरते हैं तो सिस्टम के तहत जनता उन्हें सजा देती है।
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कृषि के बारे में राहुल गांधी से ज्यादा जानता हूं 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए राजनाथ ने कहा, राहुल मुझसे काफी छोटे हैं और मैं कृषि के बारे में उनसे ज्यादा जानता हूं। मैं किसान माता-पिता के घर पैदा हुआ। हमारे पीएम खुद गरीब परिवार में पैदा हुए हैं। सरकार ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकती जो किसानों के हित में न हो।

देश के आंतरिक मामले में दखल मंजूर नहीं
किसान आंदोलन को लेकर कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के बयान पर रक्षामंत्री ने कहा, किसी देश को भारत के आंतरिक मामले में दखल नहीं देना चाहिए। भारत को यह मंजूर नहीं। हम हमारे मुद्दे खुद सुलझाने में सक्षम हैं। भारत ऐसा देश नहीं जिसके बारे में कोई कुछ भी कह सकता है।

मोबाइल टॉवर को निशाना न बनाएं किसान 
राजनाथ ने पंजाब में किसानों द्वारा मोबाइल टॉवर तोड़ने की निंदा की। उन्होंने कहा, किसानों को यह सब करने से पहले सोचना चाहिए। यह बेहद निंदनीय है और ऐसी घटनाएं रुकनी चाहिए।  

राजनाथ ने कहा कि किसानों के प्रति असंवेदनशील होने का कोई सवाल ही नहीं है। हमारे किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और केवल मैं ही ही दुखी नहीं हूं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इससे दुखी हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ ताकतों ने किसानों के बीच गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश की है। हमने कई किसानों से भी बात की है। किसानों से मेरा केवल यही अनुरोध है कि खंड-वार चर्चा की जानी चाहिए और यह केवल हां ’या 'नहीं’ में नहीं होनी चाहिए। हम जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे सिख भाइयों ने हमेशा भारत की संस्कृति की रक्षा की है। देश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनके योगदान को याद किया जाएगा। उनकी ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं है।



राहुल गांधी से ज्यादा कृषि के बारे में जानता हूं
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मुझसे छोटे हैं और मैं उनसे ज्यादा कृषि के बारे में जानता हूं। क्योंकि मैं किसान और पीएम मोदी गरीब माता के गर्भ से पैदा हुए हैं। इसलिए हम किसानों के खिलाफ फैसले नहीं ले सकते।

एमएसपी पर भी दिया जवाब
राजनाथ ने कहा कि सरकार ने बार-बार कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा। अगर नेता लोकतंत्र में वादों को पूरा नहीं करते हैं तो लोग उन्हें दंडित करेंगे। हम किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

दूसरे देश के प्रधानमंत्री को हमारे आंतरिक मामले में बोलने का अधिकार नहीं
किसान आंदोलन पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयान पर राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री को हमारे आंतरिक मामले में बोलने का अधिकार नहीं है। उन्हें हमारे मुद्दे से दूर रहना चाहिए।

पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी से दुखी हूं 
राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। पीएम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था हैं। मैंने कभी किसी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। "मर जा, मर जा" के नारे पीएम के खिलाफ लगाए गए, मुझे वाकई बहुत दुख हुआ।

किसानों को नक्सली' और 'खालिस्तानी' कहना गलत
उन्होंने किसानों को 'नक्सली' और 'खालिस्तानी' पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि हम किसानों के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त करते हैं। वे हमारे 'अन्नदाता' हैं।

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