गुजरात के राजकोट में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राजकोट के वन विभाग ने ग्रेट गोल्डन सर्कस पर छापेमारी कर उनके पास से हाथी-घोडे, तोते, कुत्ते और बकरी समेत कई पशु-पक्षियों को जब्त किया। पकड़े गए जानवरों में से दो हाथी अब विभाग के लिए मुसीबत का सबब बन गए है।
दरअसल, वन विभाग की कर्रवाई के बाद जब्त किए गए जानवरों को चिड़ियाघर प्रशासन ने रख लिया। लेकिन दो मादा हाथियों को रखने से इनकार कर दिया।
जरूरी व्यवस्था नहीं होने के अभाव में वन विभाग ने सर्कस स्थल पर ही तंबू लगाकर हाथियों की देखभाल शुरू कर दी है। देखभाल के लिए दो सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं। जिसमें विभाग पिछले पांच दिनों में हाथियों पर 85 हजार खर्च कर चुका है। इनकी खुराक पर 35 हजार रुपये भी खर्च हो चुके हैं।
वहीं सर्कस ने वन विभाग के सामने हाथियों के पालतू होने का प्रमाण पत्र पेश किया है। इससे इस बात की पुष्टि हुई कि ये हाथी वन्यजीव कानून के तहत नहीं आते हैं। ऐसे में वन विभाग ने सर्कस वालों से कहा है कि वे इन हाथियों को वापस ले जा सकते हैं।
राजकोट के आरएफओ एसए पंड्या ने बताया कि हाथियों को रखने के लिए विभाग के पास जगह नहीं थी। इसलिए उन्हें तंबू में सुरक्षा के साथ रखा गया। दोनों हाथियों को खाने के लिए विभाग को तीन तरह की घास जुटानी पड़ी रही है। जिसमें हर रोज सात हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। हाथियों के नहाने की भी व्यवस्था की गई है।
तीन शिफ्ट में हाथियों की सुरक्षा के लिए तीन सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। जिसपर कुल मिलाकर 85 हजार रुपये का खर्च आ चुका है।