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राजीव गांधी हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने हत्यारों की रिहाई रोकने से किया इनकार

Thu, 09 May 2019 10:08 PM IST
अमर शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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राजीव गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने के सात दोषियों को जेल से रिहा करने पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। तमिलनाडु सरकार ने 2014 में इन सातों हत्यारों को जेल से रिहा करने का निर्णय लिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को यह याचिका खारिज कर दी। 

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चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ 21 मई, 1991 को श्रीपेरेंबदूर में चुनावी रैली के दौरान किए गए बम धमाके में राजीव गांधी के अलावा मारे गए अन्य लोगों के परिजनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने यह याचिका खारिज करते हुए कहा, इस मामले को लेकर 2015 में शीर्ष अदालत की संविधान पीठ पहले ही फैसला दे चुकी है, लिहाजा अब उसमें दखल देने का कोई कारण नहीं बनता।

बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने 2014 में सात दोषियों की रिहाई की सिफारिश की थी। राज्य सरकार का तर्क था कि पेरारीवालन, वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, टी. सुथेंद्राराजा उर्फ संथम, जयाकुमार, राबर्ट पायस, पी. रविचंद्रन और नलिनी जेल में 25 साल से ज्यादा का समय बिता चुके हैं। फिलहाल यह सिफारिश राज्यपाल के पास लंबित है। 

आठ साल का था घटना के समय एक याचिकाकर्ता

तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से रिहाई का फैसला लिया गया था, जिसे 2014 में ही एस. अब्बास और तीन अन्य ने चुनौती दी थी। राजीव गांधी की हत्या के लिए किए गए बम धमाके में अब्बास की मां भी मारी गई थी। फिलहाल 36 साल के हो चुके अब्बास तब महज 8 साल के थे। 

कब-कब क्या हुआ

  • 21 म्रई 1991 को राजीव गांधी को श्रीलंकाई आतंकी संगठन लिट्टे की एक महिला आत्मघाती हमलावर धानु ने बेल्ट बम में विस्फोट कर उड़ा दिया था
  • भारत में यह किसी हाई प्रोफाइल नेता की हत्या आत्मघाती विस्फोट के जरिए किए जाने का पहला मामला था।
  • सीबीआई की विशेष जांच टीम ने चार्जशीट में 41 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 12 बम धमाके में मारे गए थे व 3 फरार थे।
  • चेन्नई की टाडा अदालत ने 1998 में 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी।
  • मई, 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने मुरुगन, संथम, पेरारीवालन और नलिनी की मौत की सजा बरकरार रखी थी।
  • शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में अन्य तीन की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलते हुए 19 दोषियों को रिहा कर दिया था।
  • अप्रैल, 2000 में राजीव गांधी की पत्नी व तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नलिनी को मृत्युदंड नहीं देने की अपील की थी।
  • सोनिया गांधी और तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राज्यपाल ने नलिनी की मौत की सजा खारिज कर दी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी, 2014 को मुरुगन, संथम व पेरारीवालन की दया याचिका 11 साल से लंबित होने के आधार पर उनका मृत्युदंड भी खारिज कर दिया था।
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