सुपरस्टार रजनीकांत की आध्यात्मिक राजनीति का किसी धर्म विशेष से कोई लेना-देना नहीं है। रजनीकांत के करीबी तमिझारुवी मणियन ने शनिवार को यह बात कही।तमिझारुवी मणियन ने कहा कि आध्यात्मिक राजनीति पहली बार महात्मा गांधी ने शुरू की थी। रजनीकांत ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह अगले साल विधानसभा चुनावों का सामना करने और आध्यात्मिक राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए जनवरी, 2021 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे।
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि तमिलनाडु में रजनीकांत की पार्टी के संभावित असर का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी। पार्टी के तमिलनाडु मामलों के प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने यह दावा भी किया कि बड़ी संख्या में भाजपा के लोग तमिल फिल्मों के मशहूर अभिनेता के साथ जुड़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि रजनीकांत की पार्टी का अभी पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके प्रस्तावित दल की विचारधारा और कार्यक्रम अभी तक अज्ञात हैं और यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी या कोई गठबंधन बनाएगी। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राव ने कहा कि एक बार ये चीजें स्पष्ट हो जाएं, तो हम आकलन कर सकेंगे। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
रजनीकांत राजनीति में सफल नहीं हो पाएंगे : वीरप्पा मोइली
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को दावा किया कि तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत दक्षिणी राज्य की राजनीति में सफल नहीं हो पाएंगे और वहां द्रविड़ संस्कृति के लोकाचार हमेशा आगे रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का तमिलनाडु में स्वतंत्र अस्तित्व नहीं हो सका और उसने हमेशा अन्नाद्रमुक या द्रमुक के साथ गठबंधन किया। मोइली ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि रजनीकांत राजनीति में सफल हो पाएंगे क्योंकि द्रविड़ संस्कृति का लोकाचार तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा आगे रहा है। तमिलनाडु में कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी तमिल पार्टी, क्षेत्रीय पार्टी से जुड़े बिना नहीं टिक सकती।
मोइली ने कहा कि रजनीकांत ने पहले ही ऐसी धारणा दी है कि वह कमोबेश भाजपा के आदर्शों के साथ जुड़े हैं। जब तक रजनीकांत फिर से द्रविड़ संस्कृति के लोकाचार से फिर से खुद को समृद्ध नहीं करते, मुझे नहीं लगता कि उनका कोई (राजनीतिक) भविष्य होगा।
रजनीकांत का यह दांव कितना सफल होगा ?
तमिलनाडु में यदि ‘आध्यात्मिक राजनीति’ के साथ-साथ ‘सब कुछ बदलने’ का राजनीतिक मंत्र काम कर जाता है, तो रजनीकांत अन्नाद्रमुक के संस्थापक एम जी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर और पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के बाद राज्य में राजनीतिक सफलता का स्वाद चखने वाले रुपहले पर्दे के तीसरे स्टार बन जाएंगे। राजनीति में उनका करिश्मा चलेगा या नहीं, यह कुछ हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह लोगों के बीच अपनी आध्यात्मिक राजनीति और बदलाव के मंत्र के अलावा अन्य कारकों को कैसे रखेंगे। तमिलनाडु में अप्रैल-मई 2021 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है।
अभिनेता के अनुसार, आध्यात्मिक राजनीति ईमानदारी, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति है, जो सुशासन प्रदान करने के लिए जाति और धर्म की बाधाओं को पार करती है। रजनीकांत ने अतीत में अपने आप को दिवंगत एमजीआर का जबरदस्त प्रशंसक बताया था। अब अभिनेता ने गरीब और आम आदमी के लाभ के लिए एक अच्छे प्रशासन का आश्वासन देने के लिए उनकी विरासत का आह्वान किया है।
वर्ष 1972 में अन्नाद्रमुक की स्थापना करने से पहले एमजीआर द्रमुक के साथ थे और राजनीति में भी सक्रिय थे। अभिनेता की चुनावी संभावनाओं पर राजनीतिक विश्लेषक सुमंत रमन ने कहा कि इस पर भविष्यवाणी करना बहुत जल्दबाजी होगा क्योंकि अभिनेता द्वारा बहुत से सवालों के जवाब दिए जाने है।
रमन ने हैरानी जताई कि सब कुछ बदलने का अर्थ क्या है? उनकी नीति और कार्यक्रम क्या है? उन्होंने कहा कि अभिनेता को इस बात के बारे में विस्तार से बताना चाहिए कि वह उस बदलाव को कैसे आगे बढ़ायेंगे, जिसका उन्होंने वादा किया है। उन्होंने कहा कि बहुत सी बातें जैसे अगर उनकी पार्टी सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, तो उम्मीदवार कौन होंगे या चुनावी गठबंधन की कोई संभावना है या नहीं, इसके बारे में अभी नहीं पता है।उन्होंने कहा कि रजनीकांत को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने के लिए विश्वसनीय चेहरों की एक बड़ी टीम की आवश्यकता भी होगी।
रमन ने कहा, ‘‘रजनीकांत प्रभावित करेंगे। लेकिन वास्तव में बड़ा प्रभाव छोड़ने के लिए इस तरह के सवालों के जवाब होने चाहिए। मैं देख सकता हूं कि अन्नाद्रमुक और द्रमुक दोनों ही उनकी राजनीतिक पारी से परेशान है।’’ आध्यात्मिक राजनीति पर, उन्होंने कहा कि द्रमुक इसे घुमाने की कोशिश कर सकती है, लेकिन वह इसके बारे में ‘नकारात्मकता’ नहीं देखते है।