राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने तमिलनाडु के 27वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने शपथ दिलाई। लोक भवन के भरथियार मंडपम में पहुंचने पर अर्लेकर का मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने गर्मजोशी से स्वागत किया गया। वे इससे पहले बिहार और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके हैं। लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्होंने तमिलनाडु में राज्यपाल पद की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से मिली। इसका मतलब यह है कि वह केरल के साथ-साथ तमिलनाडु के राजभवन की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
कई शीर्ष अधिकारी रहें उपस्थित
तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु, राज्य मंत्री केएन नेहरू, ईवी वेलू, पीके शेखर बाबू और एस रेगूपथी, केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन और शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे। चेन्नई स्थित सशस्त्र बलों के प्रमुख, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भाजपा नेता नैनार नागेंद्रन और तमिलिसाई साउंडराराजन सहित कई व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्यपाल की पत्नी अनाघा अर्लेकर भी मंच पर मौजूद थीं। स्टालिन ने राज्यपाल से अपने मंत्रिपरिषद का परिचय कराया। इसके साथ ही तमिलनाडु पुलिस ने अर्लेकर को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राज्यपाल के पूर्ववर्ती आरएन रवि का सत्तारूढ़ डीएमके सरकार से हमेशा से ही मतभेद रहा था। 12 मार्च को रवि ने चुनाव वाले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
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