डीप फेक वीडियोज और एआई के दुष्प्रभावों के कारण इस समय दुनिया परेशान है। दुनिया भर के तमाम देशों के साथ-साथ भारत भी इसे लेकर चिंतित है। इस बीच आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि डिजिटल इंडिया अधिनियम के तहत इन सभी परेशानियों को परेशानियों को शामिल किया जाएगा। बता दें, यह नया अधिनियम वर्तमान आईटी अधिनियम की जगह लेगा।
तकनीक का सही इस्तेमाल आवश्यक
राज्यमंत्री शुक्रवार को सद्गुरु अकादमी (पूर्व में ईशा लीडरशिप अकादमी) के प्रमुख कार्यक्रम "इनसाइट" के 12वें संस्करण में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान आईटी एक्ट 22 साल पुराना है। इसमें तो इनटरनेट तक का जिक्र नहीं है। इसलिए एआई को विनियमित करने के लिए, डिजिटल इंडिया अधिनियम बनाना होगा जो एआई के सभी नुकसानों से निपटेगा। इस दौरान ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि मैं कभी भी प्रौद्योगिकी को समस्या के रूप में नहीं देखता। प्रौद्योगिकी एक संभावना है। लेकिन अगर हम किसी भी तकनीक का सही से इस्तेमाल नहीं करते तो वह हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।
मंत्री ने कहा कि आज हमारे 845 मिलियन भारतीय इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, 400 मिलियन अब भी ऐसे हैं, जो इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते। चंद्रशेखर ने उम्मीद जताई कि 2026 तक 1.2 अरब भारतीय इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे।
एफआईआर दर्ज कराने में मिलेगी मदद
राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों की बैठक में कहा, आज से आईटी नियमों के उल्लंघन पर शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) एक ऐसा मंच विकसित करेगा, जिस पर उपयोगकर्ता आईटी नियमों के उल्लंघन के बारे में सूचित कर सकते हैं। इससे आसानी से एफआईआर दर्ज करने में सहायता मिलेगी। मंत्री ने कहा, न सिर्फ आईटी उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी बल्कि सामग्री कहां से और किसने पोस्ट की है उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।
12 प्रकार की सामग्री व सूचनाएं नहीं की जाएंगी बर्दाश्त
चंद्रशेखर ने कहा, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से भारतीय इंटरनेट पर प्रतिबंधित 12 प्रकार की सामग्री व सूचनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी। भारत सरकार अक्तूबर 2022 में उल्लिखित 12 निषिद्ध क्षेत्रों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियम अधिकारी की तैनाती भी करेगी।
सीईआरटी-इन के अधिकारियों से मिलेंगे एपल साइबर सुरक्षा अधिकारी
इसके अलावा, अमेरिका से एपल के साइबर सुरक्षा अधिकारी इस महीने सीईआरटी-इन के अधिकारियों से मिल सकते हैं। दरअसल, विपक्ष के कई सांसदों को उनके आईफोन पर चेतावनी अधिसूचना मिली थी, जिसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कई विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि उन्हें एपल से एक अलर्ट मिला है, जिसमें सरकार द्वारा हैकिंग और आईफोन से छेड़छाड़ की कोशिश करने की जानकारी दी गई है।
केंद्रीय मंत्री के कड़े रुख
मामले में चंद्रशेखर ने कहा कि एपल को नोटिस देना होगा। यह गंभीर मुद्दा है। सांसदों के फोन के साथ छेड़खानी साइबर अपराध है। इसे नहीं सहा जा सकता है। अधिकारियों को यहां आना ही होगा। उन्हें इस बारे में जवाब देना होगा। एपल द्वारा जिन सासंदों को अलर्ट मिला है, उनमें कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल, सुप्रिया श्रीनेत, टीएस सिंहदेव, भूपिंदर हुड्डा, महुआ मोइत्रा, सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी, एसपी प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कुछ सहयोगियों का नाम शामिल है।