बैकलॉग और प्रक्रियाधीन भर्तियों में पांच फीसदी आरक्षण समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर एक नवंबर को गुर्जर समाज ने राजस्थान में आंदोलन की चेतावनी दी है। इसे देखते हुए राज्य सरकार सक्रिय हो गई है। सरकार ने गुर्जर बाहुल्य भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, दौसा, टोंक, बूंदी और झालावाड़ जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू कर दिया है। वहीं, करौली में धारा 144 लागू कर दी गई है।
प्रशासन पूरी तरह से चौंकन्ना हो गया है। भरतपुर जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस की कई टीमों को जिले में भेज दिया गया है। इसके अलावा जीआरपी और आरपीएफ के जवानों की भी तैयारी की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, भरतपुर के बयाना में जीआरपी के 50 और आरपीएफ के 150 जवान पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, शहर के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।
आंदोलन को लेकर बैंसला गुट पर कसा शिकंजा
राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने रासुका लगाकर वार्ता में शामिल नहीं हो रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला गुट पर शिकंजा कस दिया है। सरकार की तरफ से बैंसला गुट से लगातार वार्ता की पेशकश की जा रही है, लेकिन गुट वार्ता नहीं कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि आंदोलन की शुरुआत होते ही सरकार बैंसला गुट के नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है।
यहां से हो सकती है आंदोलन की शुरुआत
आरक्षण की मांग नहीं पूरी होने से नाराज गुर्जर समाज ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने का एलान किया है। बताया गया है कि आंदोलन की शुरुआत भरतपुर जिले के बयाना स्थित पीलूपुरा से होगी। इसके लिए एक नवंबर की सुबह 10 बजे शहीद स्थल पर महापंचायत होगी।
क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून
23 सितंबर 1980 को अस्तित्व में आए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की मदद से केंद्र एवं राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति को 12 माह तक हिरासत में रख सकती है। रासुका लाने का मकसद, देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार को अधिक शक्ति प्रदान करना था। इस कानून की मदद से केंद्र व राज्य सरकारें किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले सकती हैं। यदि किसी सरकार को यह महसूस होता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है तो उसे रासुका के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसे व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 माह तक हिरासत में रखने में प्रावधान है। जब किसी व्यक्ति पर रासुका लगाया जाता है तो संबंधित राज्य सरकार, केंद्र को सूचित करती है कि फलां व्यक्ति को इस अधिनियम के अंतर्गत हिरासत में लिया गया है।