रविवार को सचिन पायलट अपने काफिले के साथ जालोर जिले के सांचौर के समीप कासेला गांव पहुंच गए। पायलट खेत में खुले आसमान के नीचे चारपाई पर सोए। जो खाना वहां के किसान खाते हैं, वही पायलट ने खाया। जिनकी झोपड़ी में वे रहे, दरअसल वे सचिन के मित्र भी रहे हैं। उनका नाम जयकिशन बिश्नोई है। एक बार सचिन ने कहा था कि वे बिश्नोई के खेत में आकर रहेंगे।अब वे डिप्टी सीएम बन गए, लेकिन अपना वादा नहीं भूले।
बिलकुल ठेठ अंदाज में नजर आए पायलट ने अपनी शेविंग भी चारपाई पर बैठकर की। रात में खूब गपशप होती तो सुबह चाय पर वे लोगों से चर्चा करते। शासन-प्रशासन, राजनीति, खेती-किसानी और ग्रामीणों की समस्याएं, उन्होंने इन सब विषयों पर जमकर बातचीत की। दिन में उन्होंने अपने विभाग यानी पंचायती राज के कामों की समीक्षा कर कई फाइलें भी निपटाईं। उनके आसपास वीवीआईपी जैसा कुछ नहीं था।
खुद सचिन पायलट का मानना है कि सरकार और लोगों के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि लगातार जनता के संपर्क में रहेंगे तो ही लोकतंत्र सही मायने में आगे बढ़ सकेगा। पायलट का कहना था कि यह बहुत जरूरी है कि कांग्रेस पार्टी के नेता वापस जाकर लोगों से संपर्क साधें। इससे सत्ता और आमजन के बीच की दूरी को कम किया जा सकेगा। जब यह दूरी कम हो जाएगी तो जनहित के कार्यों की कोई भी फाइल पेंडिंग नहीं बचेगी।
कांग्रेस के कई दूसरे नेता भी अब यह मानने लगे हैं कि केवल चुनाव के दौरान जनता के बीच जाने से बात नहीं बनेगी। पायलट एक झोपड़ी में नहीं ठहरे हैं, बल्कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को यह संदेश दे दिया है कि सरकार तक पहुंचने की राह इन्हीं झोपड़ियों से निकलेगी। हो सकता है कि अगले माह से सभी राज्यों में कांग्रेस पार्टी की इकाईयां जैसे सेवा दल, महिला विंग और युवा कांग्रेस आदि भी गांवों का रुख करती हुई दिखाई दें।