भाजपा के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिश के आरोप पर कहा, इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है। मैंने राजस्थान में कांग्रेस को जिताने के लिए जीतोड़ मेहनत की है। मैं पार्टी के खिलाफ काम क्यों करूंगा? मैं अभी यही कहना चाहता हूं कि मैं अपने लोगों के लिए काम करता रहूंगा।
पायलट से जब भाजपा नेताओं से मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैंने भाजपा के किसी नेता से मुलाकात नहीं की है। छह महीने से ज्योतिरादित्य सिंधिया या ओम माथुर किसी से नहीं मिला हूं।
पायलट ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री पद की बात तब की थी जब मैंने 2018 में पार्टी की जीत की अगुआई की थी। पांच साल के लिए मैंने काम किया और गहलोत ने एक शब्द भी नहीं बोला। चुनाव जीतते ही गहलोत ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोक दिया। 2018 से पहले गहलोत दो बार मुख्यमंत्री बने।
दो चुनाव में उनकी अगुआई में पार्टी 56 और 26 पर आ पहुंची। इसके बाद भी उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री बना दिया गया। हालांकि, राहुल गांधी का फैसला मानते हुए मैं डिप्टी सीएम भी बन गया। राहुल ने सत्ता का बराबर बंटवारा करने की बात कही थी, लेकिन गहलोत ने मुझे नजरअंदाज कर दिया।
राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं हैं। राहुल ने जब से इस्तीफा दिया, तभी से गहलोत और उनके साथियों ने मेरे खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तभी से मेरे लिए आत्मसम्मान मुश्किल हो गया। सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मेरी कोई बात नहीं हुई।
प्रियंका गांधी ने मुझसे बात की थी, लेकिन वह निजी चर्चा थी। उससे कोई हल नहीं निकला। मैंने सिर्फ यही चाहा है कि आत्मसम्मान के साथ काम करने की जगह मिल सके, जो मुझसे वादा किया गया था। मैं फिर कहना चाहता हूं कि ये सत्ता की बात नहीं है, ये आत्मसम्मान की बात है।