सचिन पायलट की नम आवाज कांग्रेस के आला नेताओं के कलेजे में तीर की तरह चुभ रही थी। सचिन ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी छोड़ने की सोच भी नहीं सकते, लेकिन पिछले दिनों न जाने क्या-क्या कहा गया, मीडिया में भी छपा? कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी सचिन पायलट पर इतना ही भरोसा था। इसलिए दोनों ने पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधना बेहतर समझा।
टीम सचिन पायलट का कहना है कि पायलट की छवि खराब करने, पायलट समेत कुछ विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने या सदस्यता समाप्त कराने में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व सचिव ने कहा कि जो भी हुआ, अच्छा नहीं कहा जाएगा। लेकिन सबकुछ ठीक होने की तरफ बढ़ रहा है, इसलिए अब खराब दिनों को भूल जाने में ही भलाई है।
सचिन पायलट के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बताते हैं गहलोत ने सचिन पायलट को कटी पतंग बनाने का पूरा इंतजाम कर लिया था। वह चाहते थे कि सचिन पायलट और उनके साथ के विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाए। इसके बाद सचिन पायलट की धीरे-धीरे राजनीति ही खत्म हो जाएगी।
यदि राजस्थान विधानसभा का सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह के आसपास बुलाया जाता, तो अब तक सचिन पायलट के पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। हालांकि पायलट खेमे के एक नेता का कहना है कि सचिन और उन सभी का इरादा अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाना है। वहीं अशोक गहलोत पायलट के साथ अपने झगड़े को कांग्रेस पार्टी के साथ मतभेद और बगावत साबित करने में लगे थे।
वहीं अब यह सब बातें रखी जाएंगी और देखना होगा कि पार्टी हम सभी के आत्मसम्मान की रक्षा कैसे करती है। कर्नाटक के कांग्रेस के एक बड़े नेता पहले दिल्ली में सक्रिय थे। इस समय राज्य को समय दे रहे हैं। उनका भी मानना है कि शुरुआत में मामले का समाधान करने में कुछ चूक हुई, लेकिन यह सही है कि कुछ काम समय पर हो पाते हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस अध्यक्ष के मोर्चा संभालने के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा।