राजस्थान में चुनावी बिगुल बज चुका है। करीब पौने पांच लाख मतदाता तय करेंगे कि इस बार राज्य में किसकी सरकार बनेगी। दिलचस्प बात ये है कि उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला युवा मतदाता करेंगे। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी होंगे जो पहली बार वोट डालेंगे। इस बार भाजपा और कांग्रेस की नजर ऐसे ही युवा मतदाताओं पर है।
कुल 4.74 करोड़ मतदाताओं में 2.81 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जिनकी उम्र 39 साल तक है। ये आंकड़ा कुल मतदाताओं का 59 फीसदी है। लेकिन एक तथ्य ये भी है कि भले ही राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या 2.81 करोड़ हो लेकिन विधानसभा में युवाओं की भागीदारी बेहद कम है। पिछले दो विधानसभा में 17.5 फीसदी विधायक ऐसे थे जिनकी उम्र 40 साल थी।
कुल 4.74 करोड़ मतदाता
2.81 मतदाताओं की उम्र 39 साल
ये कुल मतदाताओं का 59 फीसदी
17.5 फीसदी विधायकों की उम्र 40 साल तक
मंत्रियों की औसत उम्र 60 साल
मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्रियों की औसत उम्र 60 साल है। जबकि पिछली गहलोत सरकार में भी मंत्रियों की औसत उम्र 59 साल थी। मौजूदा भाजपा सरकार में स्पीकर की उम्र ही 84 साल है। चार मंत्रियों की उम्र 70 से 75 साल है।
इन आंकड़ों से साफ है कि भले ही भाजपा-कांग्रेस का दारोमदार युवा वोटरों पर हो, लेकिन टिकट वितरण में युवाओं की अनदेखी की जाती है। 59 फीसदी युवा वोटरों का आंकड़ा एक बड़ा आंकड़ा है। इस बार ये तस्वीर कितनी बदलती है ये कुछ ही दिनों में साफ हो जाएगा।
पांच राज्यों में चुनाव
चुनाव आयोग ने 6 अक्तूबर को पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव तारीखों का एलान कर दिया। छत्तीसगढ़ में दो चरणों और बाकी चार राज्यों में एक ही चरण में मतदान होगा। चुनाव आयोग के इस एलान के साथ ही पांचों राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। 2019 आम चुनाव के मद्देनजर ये चुनाव बेहद अहम है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार 15 साल से सत्ता में है। वहीं राजस्थान में भाजपा ने 2013 में सत्ता में वापसी की थी। इस बार वसुंधरा राजे के सामने सत्ता बचाए रखने की कड़ी चुनौती है। विधानसभा चुनाव नतीजे ही 2019 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करेंगे।