हालांकि कार्यक्रम का आयोजन करने वाली इस संस्था से उत्तर भारतीय भी अनजान हैं। 25 नवंबर को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे अयोध्या जाने वाले हैं। समझा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे राम मंदिर के मुद्दे के साथ-साथ उत्तर भारतीय समाज को भी करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में राज ठाकरे का उत्तर भारतीयों के साथ संवाद कार्यक्रम में जाने का फैसला अहम माना जा रहा है।
मनसे नेता देशपांडे ने उत्तर भारतीयों के विरोध के आरोप पर कहा कि किसी मुद्दे को लेकर हमारे विचार भिन्न हो सकते हैं लेकिन, किसी समाज के मंच पर जाकर अपने विचार रखने में कोई बुराई नहीं है। देशपांडे ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के मंच पर जा सकते हैं तो राज ठाकरे उत्तर भारतीयों के मंच पर क्यों नहीं जा सकते।
इस बीच, मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि राज ठाकरे को पहले उत्तर भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए। इसके बाद उत्तर भारतीय समाज उन्हें स्वीकार करेगा। निरुपम ने कहा कि मैं राज के फैसले का स्वागत करता हूं। लेकिन, उन्होंने उत्तर भारतीयों के साथ जो बर्ताव किया है उसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।