मुंबई में दही हांडी के आयोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि क्या अब हम टेबल पर खड़े होकर दही हांडी फोड़ें ? उन्होंने कहा कि न्यायालय को अपना दिमाग ठिकाने पर रखकर फैसला सुनाना चाहिए। परंपरा और संस्कृति के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। राज ने कहा कि जब तक कुछ अदालत की ही मर्जी होगी तो चुनाव कराना बंद कर सरकार चलाने की जिम्मेदारी भी कोर्ट को ही सौंप देनी चाहिए।
राज ठाकरे ने कहा कि अदालत को केवल हिंदुओं के त्यौहार नजर आते हैं। उनको मुसलमानों की मस्जिदें नहीं दिखती हैं। उन्होंने पूछा कि मुहर्रम में बच्चों के हिस्सा लेने पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। न्यायालय को हर मामले में नाक घुसाने की जरूरत नहीं है। राज ने माना कि दही हांडी में तीन- साल के छोटे बच्चों को सहभागी नहीं होना चाहिए। लेकिन, हमें दही हांडी के लिए बनाए जाने वाले मानव पिरामिड की ऊंचाई निश्चित करने के फैसले पर आपत्ति है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिरामिड की ऊंचाई 20 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जब सब कुछ न्यायालय ही तय करेगा तो हम लोगों का क्या काम है। राज ने कहा कि प्रदेश सरकार इस मामले में न्यायालय में ठोस तरीके से अपना पक्ष नहीं रख सकी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह का फैसला सुनाया है।
गौरतलब कि सुप्रीम कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दही हांडी के आयोजन में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के भाग लेने पर रोक लगाई है। न्यायालय ने कहा है कि दही हांडी के लिए मानव पिरामिड की ऊंचाई 20 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इस फैसले पर राज ठाकरे ने एतराज जताया है।