महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के एक साल पूरे होने से पहले ही उन पर दबाव बढ़ गया है। राज्य में लॉकडाउन के दौरान बढ़े हुए बिल से जनता को राहत दिलाने के लिए भाजपा के बाद अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी सड़क पर उतर गई है। मनसे ने बिजली उपभोक्ताओं से लॉकडाऊन के दौरान के बिल का भुगतान न करने की अपील कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे सूबे में ठाकरे बनाम ठाकरे के बीच नई जंग की शुरूआत हुई है।
महाराष्ट्र की महाआघाड़ी सरकार ने पहले घोषणा की थी कि उपभोक्ताओं को बिजली बिल से राहत दी जाएगी। लेकिन उसके बाद सरकार अपने वादे से मुकर गई। इसके बाद भाजपा ने बिजली बिल की होली जलाकर राज्यव्यापी आंदोलन किया। बृहस्पतिवार को मनसे के कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरे।
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि महाविकास आघाड़ी सरकार ने बिजली बिल पर जजिया कर लगाया है और जनता की लूट शुरू की है। हमने जनता का आह्वान किया है कि वे बिजली बिल अदा न करें। यदि किसी का बिजली कनेक्शन कटा तो मनसे कार्यकर्ता इसका जवाब देंगे।
नितिन ने जल्दबाजी में किया फैसला- अशोक चव्हाण
राज्य पर 4 लाख करोड़ का कर्ज है – नितिन राऊत
ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत ने कहा कि ग्राहकों को बिजली बिल भरने के लिए सहूलियतें दी गई है। क्रूड ऑयल का भाव कम होने के बावजूद पेट्रोल 85 रुपए लीटर बिक रहा है। केंद्र सरकार से जीएसटी का 28 हजार करोड़ रुपए महाराष्ट्र को नहीं मिला। राऊत ने कहा, भाजपा सरकार में ही उनके राज्य की तिजोरी खाली हो गई थी। राज्य पर 4 लाख करोड़ का कर्ज है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ा संकट है।