फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संसद: 'सामान्य स्थिति में पाकिस्तान नहीं जाता सतलुज-ब्यास नदियों का पानी', लोकसभा में राजभूषण चौधरी का जवाब

Thu, 06 Feb 2025 07:38 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत-पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी को लेकर केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में आज बताया कि मानसून के अलावा सतलुज और ब्यास नदियों का पानी पाकिस्तान नहीं जाता है। दूसरी ओर राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन को लेकर भी अपना जवाब दिया। 
विज्ञापन
संसद भवन - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत-पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि मानसून जैसी कुछ दुर्लभ मामलों के अलावा भारत सामान्य परिस्थितियों में पाकिस्तान को सतलुज और व्यास नदियों का पानी नहीं देता है। 
विज्ञापन


लोकसभा में राजभूषण चौधरी का जवाब
मामले में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर दिया। इसमें उन्होंने कहा कि केवल मानसून के दौरान, जब भारी बारिश के कारण जलाशयों का जल स्तर बढ़ जाता है, तब ही पाकिस्तान को सतलुज और व्यास नदियों का पानी दिया जाता है। 

उन्होंने बताया कि ये असाधारण परिस्थितियों में होता है, खासकर जब बांधों में पानी का स्तर बहुत बढ़ जाता है और सुरक्षा के लिए उसे छोड़ना जरूरी होता है। इसके अलावा पाकिस्तान को सतलुज और ब्यास नदियों का पानी नहीं दिया जाता है। 
विज्ञापन


भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि
बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत पानी का बंटवारा किया गया था, जिसके मुताबिक भारत को सतलुज, व्यास और रावी नदियों का पानी नियंत्रित करने का अधिकार है, जबकि पाकिस्तान सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का प्रबंधन करता है।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों के वेतन बढ़ोतरी का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
दूसरी ओर गुरुवार को राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन में बढ़ोतरी पर बात की। उन्होंने एक लिखित जवाब में बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के वेतन और भत्ते बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि 2017 में आखिरी बार जजों के वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी की गई थी, और अब इस बारे में कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

जजों के वर्तमान वेतन का किया जिक्र
साथ ही उन्होंने जजों के वतन पर जोर देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के वेतन और भत्ते संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित हैं। सुप्रीम कोर्ट जजों का वेतन 2.80 लाख रुपये प्रति माह है, जबकि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को 2.50 लाख रुपये और अन्य जजों को 2.25 लाख रुपये प्रति माह मिलते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने हाल ही में यह घोषणा की थी कि वह 8वें वेतन आयोग का गठन करेगी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें