भारतीय रेलवे लंबी दूरी की रात की यात्रा को ज्यादा आरामदायक बनाने के लिए 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन विकसित कर रहा है। मौजूदा 16 कोच वाले मॉडल के मुकाबले इसमें ज्यादा जगह, बेहतर इंटीरियर और पैंट्री कार जैसी सुविधाएं मिलने की योजना है। इसका उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर सफर का अनुभव देना है।
जून 2027 तक पेश करने का लक्ष्य
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) को 24 कोच वाली 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। फिलहाल ट्रेन के डिजाइन पर काम चल रहा है, जिसे करीब एक महीने में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इसके प्रोटोटाइप को 2027 की पहली छमाही में तैयार करने और जून 2027 तक पेश करने का लक्ष्य रखा गया है।
पैंट्री कार और आधुनिक सुविधाओं पर जोर
नई ट्रेन में पैंट्री कार जोड़ी जाएगी, जिससे लंबी यात्रा के दौरान भोजन गर्म करने और यात्रियों को परोसने में सुविधा होगी। इसके अलावा, टॉयलेट की संख्या बढ़ाने और कोच के इंटीरियर को बेहतर बनाने की योजना है।
ट्रेन की प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार होंगी:
• रफ्तार: ट्रेन को 160 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया जाएगा। परीक्षण के दौरान इसकी गति 180 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। वास्तविक रफ्तार ट्रैक की क्षमता पर निर्भर करेगी।
• आरामदायक बर्थ: बर्थ को बेहतर बनाने और ऊपरी बर्थ पर चढ़ने-उतरने की व्यवस्था आसान करने पर ध्यान दिया जाएगा।
• आधुनिक लाइटिंग: रात के सफर के लिए विशेष रोशनी, विजुअल डिस्प्ले और सीसीटीवी कैमरे होंगे।
• बेहतर टॉयलेट: बायो-वैक्यूम शौचालयों के साथ दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष टॉयलेट और बेबी केयर स्टेशन की सुविधा होगी।
• फर्स्ट एसी में शॉवर: एसी फर्स्ट क्लास कोच में गर्म पानी के साथ शॉवर उपलब्ध कराने की योजना है।
• सुरक्षा तकनीक: स्वदेशी कवच प्रणाली दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद करेगी। ऊर्जा बचाने के लिए रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक भी इस्तेमाल होगी।
• कोच के बीच आवाजाही: ऑटोमैटिक दरवाजे और सील गैंगवे यात्रियों की आवाजाही तथा कोच के भीतर तापमान बनाए रखने में मदद करेंगे।
• आपातकालीन संपर्क: सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग और इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम भी दिया जाएगा।
राजधानी एक्सप्रेस से कितनी अलग होगी नई ट्रेन?
राजधानी एक्सप्रेस लंबे समय से प्रीमियम लंबी दूरी की यात्रा के लिए जानी जाती है। वंदे भारत स्लीपर में आधुनिक बर्थ, उन्नत सुरक्षा तकनीक और बेहतर इंटीरियर जैसी सुविधाएं इसे एक विकल्प बना सकती हैं। हालांकि, दोनों ट्रेनों के बीच वास्तविक अंतर का पता अंतिम डिजाइन, किराए और परिचालन विवरण सामने आने के बाद ही चलेगा।
किन कंपनियों को मिला निर्माण का काम?
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना में कई कंपनियां शामिल हैं। BEML और ICF मिलकर 10 ट्रेनसेट तैयार कर रहे हैं। भारत-रूस का संयुक्त उद्यम किनेट 120 ट्रेनसेट की परियोजना से जुड़ा है, जबकि टिटागढ़ रेल सिस्टम्स और BHEL की साझेदारी में 80 ट्रेनें बनाई जानी हैं। ICF 24 कोच वाले नए संस्करण पर भी काम कर रही है। नई ट्रेन का अंतिम डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद इसकी सुविधाओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल जून 2027 तक इसे पेश करना रेलवे का लक्ष्य है।