भारतीय रेलवे यात्री ट्रेनों को तेज और बेहतर बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत 6,000 हॉर्स पावर के नए और कम ऊर्जा खपत वाले इंजन खरीदे जाएंगे। ये इंजन शोर भी कम करेंगे। इन्हें ट्रेन के आगे और पीछे लगाकर पुश-पुल तकनीक से चलाया जाएगा। इससे ट्रेन तेजी से रफ्तार पकड़ सकेगी। दोनों इंजन मिलकर 12,000 हॉर्स पावर की ताकत देंगे।
इन इंजनों की खरीद और रखरखाव के लिए निजी और सरकारी तकनीकी कंपनियों के साथ करार किया जाएगा। ट्रेनों में नए इंजन लगने के बाद अलग से पावर जनरेटर कोच लगाने की जरूरत नहीं होगी। इसी व्यवस्था से कोच की लाइट, पंखे और एसी के लिए बिजली मिलेगी। इससे सामान्य यात्री ट्रेनों में भी यात्रा अधिक आरामदायक होने की उम्मीद है। जिन रूट को ज्यादा रफ्तार के लिए तैयार किया गया है, उन पर इन इंजनों की मदद से ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकेंगी। अभी सामान्य यात्री ट्रेनों में 5,000 से 6,000 हॉर्सपावर के इंजन इस्तेमाल होते हैं।
इन इंजनों की खरीद और रखरखाव के लिए निजी और सरकारी तकनीकी कंपनियों के साथ सप्लाई और रखरखाव के लिए करार किए जाएंगे। इस योजना के रेलवे के ट्रेक विस्तार और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने जैसे दूसरे आधुनिकीकरण कार्यों के साथ आगे बढ़ेगी। इसका मकसद मेल-एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों की रफ्तार और संचालन को बेहतर करना है। वंदे भारत में ट्रेन को चलाने वाली मोटर कोच के नीचे लगी होती हैं। वहीं, नई पुश-पुल व्यवस्था में ट्रेन के आगे और पीछे अलग-अलग इंजन लगाए जाएंगे। यानी मौजूदा कोच को बदले बिना इन नए इंजनों की मदद से ट्रेन की रफ्तार और संचालन बेहतर किया जा सकेगा।