फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे के पास नहीं कोहरे से निपटने की तकनीक, चल रहा है शोध

Fri, 09 Dec 2016 06:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, झांसी
विज्ञापन
कोहरे में गुजरती ट्रेन
विज्ञापन
भारतीय रेल के पास आज भी कोहरे से निपटने के लिए कोई आधुनिक तकनीक नहीं है। यह अलग बात है इस दिशा में काम तेजी से हो रहा है। इसमें आईआईटी और रेलवे की रिसर्च विंग जुटा हुआ है। फिलहाल कोहरे से निपटने के लिए पुरानी पद्धतियों पर ही काम हो रहा है। 
विज्ञापन


रेल प्रशासन के लिए कोहरे में ट्रेनों का संचालन चुनौतीभरा रहता है। चालक की जरा सी चूक सैकड़ों यात्रियों का काल बन सकती है। यही कारण है कि रेलवे का रिसर्च विंग लगातार नई तकनीक पर काम कर रहा है ताकि सर्दी में भी रेल संचालन का सुचारु  हो सके। इसके लिए आईआईटी से भी मदद ली जा रही है, लेकिन अभी तक इसके सार्थक परिणाम सामने नहीं आए हैं। कोहरे से निपटने के लिए अभी भी सौ साल पुराने तरीके ही अपनाए जा रहे हैं।

 कोहरे के दौरान सिगनल नजदीक होने का संकेत देने के लिए पटरियों पर पटाखे रखने पड़ते हैं। पटाखे की आवाज से चालक समझ जाता था कि सिगनल पास है और वह गाड़ी की गति धीमी कर लेता था। जिन सेक्शनों में डबल डिस्टेंस सिगनल लगे थे, वहां फाग सेफ डिवाइज लगाए गए हैं। सिगनल आने वाला है, इसकी पहचान के लिए लाइन पर सफेद चूने के क्रास बनाए जाते हैं। यह डिवाइज लगने पर ऐसे सेक्शनों में पटाखे लगना बंद हो गए।
विज्ञापन


रेल मंडल के झांसी कानपुर रेल खंड के भुआ स्टेशन, झांसी -बांदा और बांदा- भीमसेन सेक्शन में अभी यह व्यवस्था लागू नहीं है। इस कारण वहां अभी भी पटाखे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा भी कोहरे से निपटने के लिए कई अन्य तरीके भी अपनाए गए, लेकिन वे कारगर नहीं हुए।

 कोहरे में ट्रेनों को गति देने के लिए पिछले साल इजराइल से भी विशेषज्ञों का एक दल भारत आया था। उसकी टीम ने प्रयोग किए। उनकी तकनीक से कोहरे में एक किलोमीटर दूर तक पटरी और जानवर तो नजर आ रहे थे। लेकिन इसमें एक दिक्कत रही कि लाल, हरे और पीले की जगह सिगनल काले और सफेद दिखाई दे रहे थे। इस तरह यह इजराइली तकनीकी भी काम नहीं आ सकी। यही कारण है कि अभी भी पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं। बिल्कुल साफ है कि अभी यात्रियों को सर्दी के दौरान ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान होना पड़ेगा।
 
‘रेलवे बोर्ड कोहरे से निपटने के कई तरह की तैयारियां में जुटा हुआ है। आधुनिक तकनीकों पर काम हो रहा है। उम्मीद है कि शीघ्र ही अच्छे परिणाम सामने आएंगे।’
ए. के. मिश्रा, डीआरएम झांसी रेल मंडल। 
विज्ञापन

नहीं लग टीपीवी सिस्टम, जिगजेक पट्टियां

- फोटो : SELF
रेल प्रशासन ट्रेन के इंजन में ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम (गाड़ी सुरक्षा चेतावनी यंत्र) लगाने की योजना तैयार की थी। अभी यह यंत्र ताज और महाकौशल एक्सप्रेस के इंजनों में लगाए गए हैं, जो आगरा और मथुरा रेल खंड में काम कर रहे हैं। इस यंत्र में चालक को गति का विवरण भरना पड़ता है। इससे पता लग जाता है कि सिग्नल कितनी दूर है। अभी इस तकनीक का इस्तेमाल झांसी मंडल में नहीं हो रहा।

रेल मंडल में पूर्ण ब्लाक पद्धति (एक सेक्शन में एक गाड़ी का चलना) काम करती है। कोहरे से निपटने के लिए सिगनल के दो खंभे पहले ओएचई पोल पर जिगजेक पट्टियां लगा दी गई हैं। इंजन की रोशनी पड़ते ही यह पट्टियां चमकने लगती हैं, जिससे चालक को पता लग जाता है कि सिगनल आने वाला है।

परिचालन अधिकारियों ने सभी चालक व सह चालकों को निर्देशित कर दिया गया है कि कोहरे में वह अधिकतम साठ किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार से गाड़ी नहीं चलाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें