रेलवे महाकुंभ से लौटने वाले यात्रियों को जनरल डिब्बे में कुछ सुविधाएं देने पर विचार कर रहा है। रेलवे का आकलन है कि कुंभ के दिनों में रोज औसतन 5 लाख से ज्यादा यात्री सामान्य श्रेणी के कोचों में सफर करेंगे। रेलवे का अनुमान है कि, महाकुंभ के 45 दिनों में देशभर से करीब 45 करोड़ लोगों के प्रयागराज पहुंचेंगे।
दरअसल, महाकुंभ के दौरान जनरल टिकट खरीदने वालों की बहुत ज्यादा भीड़ को देखते हुए रेलवे थोड़ी दूरी तक यात्रा फ्री यात्रा पर विचार कर रहा है। हर रोज बड़ी संख्या में जनरल टिकट उपलब्ध कराने के इंतजाम करना नामुमकिन है। पहले रेलवे से स्कैनर से टिकट देने की योजना बनाई थी। लेकिन, इसका ट्रायल सफल नहीं रहा है। इसके बाद ही सामान्य श्रेणी (जनरल कोच) के यात्रियों के लिए टिकट खरीदने की अनिवार्यता खत्म करने पर मंथन शुरू हुआ है। हालांकि अब रेलवे कुछ दूरी तक यात्रियों को यह सुविधा देने पर विचार कर रहा है। वहीं ,अगर लंबी दूरी के यात्री भीड़ में टिकट नहीं खरीद पाते, तो ट्रेन में टीटीई से टिकट ले सकेंगे। ताकि उन्हें यात्रा में कोई परेशानी नहीं हो।
3000 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी
भारतीय रेलवे महाकुंभ 2025 के लिए 3000 स्पेशल ट्रेनों के साथ 13000 से अधिक रेलगाड़ियां चलाएगा। स्पेशल ट्रेनों के अलावा मेला स्थल पर भी रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए कई इंतजाम करेगा। महाकुंभ 2025 की तैयारियों पर रेलवे अकेले प्रयागराज में ही पिछले 2 साल में 5000 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है। महाकुंभ के दौरान देश के कोने-कोने से प्रयागराज की सीधी कनेक्टिविटी रहेगी।
रेलवे लंबी दूरी के 50 शहरों से प्रयागराज के लिए आरक्षित ट्रेन चलेंगी। मुंबई, चेन्नई के अलावा गुवाहाटी, रंगापाड़ा नॉर्थ, मुंबई सीएसटी, नागपुर, पुणे, सिकंदराबाद, गुंटूर, नांदेड़, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, पुरी, संबलपुर, कन्याकुमारी, तिरुवनंतपुरम नॉर्थ, चेन्नई सेंट्रल, हावड़ा, डॉ. अंबेडकरनगर, वापी, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, वलसाड, भावनगर, जयनगर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, धनबाद, पटना, गया, रक्सौल, सहरसा, बेलागवी, मैसूर, उदयपुर सिटी, बाड़मेर, टाटानगर, रांची आदि जगहों से सीधी ट्रेन प्रयागराज के लिए चलेंगी।