नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (एनएफआईआर) ने कहा है कि केंद्रीय बजट ने निजीकरण को जोर-शोर से बढ़ावा देने के सरकार के इरादे को उजागर कर दिया है। एनएफआईआर और उसके सहयोगी संगठन इस कदम के खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन करने वाले हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को अपने बजट भाषण में प्रस्ताव दिया कि रेलवे को तेज विकास, रॉलिंग स्टॉक निर्माण और माल की आपूर्ति के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को अपनाना चाहिए। सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा था कि मंजूर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए रेलवे को 2018 से 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।
एनएफआआईआर के महासचिव एम राघवैया ने सभी रेलवे यूनियनों के महासचिवों को लिखे एक पत्र में कहा है, ‘बजट से कॉरपोरेटाइजेशन और निजीकरण को जोर शोर से बढ़ावा देने की सरकार की मंशा उजागर हो गयी है।’ उन्होंने कहा कि रेलवे कार्यबल इसे लेकर जोरदार प्रदर्शन करेगा। एनएफआईआर ने अपने सभी सहयोगियों को 10 से 13 जुलाई तक विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने को कहा है।