कांग्रेस नेता, सिंघवी यहीं पर नहीं रूके, उन्होंने साफ कह दिया कि कोरोना की आड़ में निजीकरण का प्रस्ताव आगे कर दिया है। विश्व की इतनी भंयकर त्रासदी के दौरान सरकार को निजीकरण करने के लिए ये सबसे अच्छा समय लगा है।
वो ऐसे कि इस समय सब कुछ सस्ते में ही निपट जाएगा। सरकार टेंडर देगी और उसके बाद मांग, दावा और पैमेंट सब न्यूनतम भी होंगे। आखिर रेलवे को इतने सस्ते में क्यों फेंका जा रहा है।इन सबके चलते सरकार का इरादा सही नहीं लगता।कोल माईनिंग के लिए भी कोरोना का समय चुना गया।
कोरोना के बीच नोन कैपिटव में भी कोल माईनिंग का निजीकरण हो सकता है, ये सोचने वाली बात है।इस वक्त किसमें दम है, कौन आर्थिक स्तंभ है, इतना मजबूत है, धनाढ्य है, शक्तिशाली है, जो माईनिंग का अच्छा रेट दे सकता है।
सरकार को ऐसी क्या जल्दबाजी है कि कुछ दिन संसद चलने का इंतजार नहीं कर सकी।बतौर सिंघवी, संसद आप बुलाते नहीं हैं, संसद का वर्चुअल सैशन भी नहीं करते हैं। ऐसे गंभीर मसलों पर संसद में कम से कम विचार-विमर्श तो कर लेते। अब रेलवे की जो लाइन नुकसान में हैं, प्राइवेट हाथ में जाते ही वह फायदे वाली बन जाएगी, ये कैसे होगा। क्या सरकार बताएगी।देश इन सब प्रश्नों की जवाबदेही मांगता है और जवाबदेही के सामने उन्हें सरकार से चुप्पी मिल रही है।