भारतीय रेलवे 2030 तक अपनी शक्ल बदलने की तैयारी में है। रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेन तक ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को शून्य कर देगी। रेल मंत्रालय ने मिशन ग्रीन रेलवे के लिए कमर कस ली है और इस दिशा में मिशन मोड में काम करना शुरू कर दिया है। 2023 तक रेलवे अपनी 40 हजार किलोमीटर लंबी रेल लाइनों का विद्युतीकरण करेगा।
पर्यावरण मंत्रालय के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार देश की पर्यावरणीय चिंताओं के लेकर मंत्रालय लगातार विभिन्न मंत्रालयों के साथ सामंजस्य करके कार्बन उत्सर्जन के लिए तय मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। रेलवे ने तो शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने के लिए बड़े पैमाने पर सुधार योजनाओं को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
इसके तहत लोकोमोटिव और रेलों की विद्युत लाइनों में लगातार पुरानी तकनीक की जगह नई तकनीकों का इस्तेमाल कर उन्हें बदला जा रहा है। रेलवे स्टेशनों के आसपास की जमीनों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए वहां हरित पट्टिकाएं और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है।
ट्रेन तथा स्टेशन के शौचालयों को बायो टॉयलेट में तब्दील किया जा रहा है। इसके अलावा नवीकरणीय उर्जा के स्रोतों के प्रयोग को रेलवे में बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसमें सोलर लाइट से लेकर वायु उर्जा संयत्र तक शामिल हैं।
इसमें अब तक 900 स्टेशनों पर सौर और पवन उर्जा के 100-100 मेगावाट पैनल (संयंत्र) इमारतों की छतों पर लगाए गए हैं। जो कि 400 मेगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य के साथ निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। जलवायु परिवर्तन के लिहाज से भारतीय रेलवे ने अपनी इमारतों और स्टेशनों 100 फीसदी एलईडी रोशनी से लैस करने की मुहिम शुरू की है।