रेल मंत्रालय ने अपने विशेष स्वच्छता अभियान 3.0 के पहले 13 दिनों के दौरान कार्यालय स्क्रैप के डिस्पोजल के माध्यम से 66 लाख रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। एक आधिकारिक बयान के तहत रविवार को कहा गया कि स्क्रैप डिस्पोजल के परिणामस्वरूप, मंत्रालय 3,97,619 वर्ग फुट जगह खाली करने में भी कामयाब रहा, जिसका उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
बयान के अनुसार, रेलवे के जोनल मुख्यालय, मंडल कार्यालय, उत्पादन इकाइयां, अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन, प्रशिक्षण संस्थान और 7 हजार से अधिक स्टेशनों को अभियान के तहत कवर किया जा रहा है।
31 अक्तूबर तक का है लक्ष्य
रेलवे द्वारा एक अक्तूबर से विशेष स्वच्छता अभियान 3.0 शुरू किया गया, जिसे 31 अक्तूबर तक 10,722 चलाने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत कार्यालयों में स्क्रैप डिस्पोजल पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें कि 3,18,504 वर्ग फुट जगह खाली करने का उद्देश्य है।
इसके साथ ही इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, 13 अक्तूबर, 2023 तक अभियान के दौरान 5,297 से अधिक स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं। इस दौरान 1.02 लाख से अधिक सार्वजनिक शिकायतों का समाधान किया गया।
मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान के दौरान, कार्यालयों और कार्यस्थलों में स्क्रैप डिस्पोजल पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप 3,97,619 वर्ग फुट जगह खाली हुई और कार्यालय स्क्रैप के डिस्पोजल के माध्यम से लगभग 66.83 लाख रुपये लगभग राजस्व उत्पन्न हुआ है।
3800 से अधिक महिलाओं को दी गई आपात सहायता
आरपीएफ द्वारा इस साल अब तक 3,800 से अधिक महिलाओं और लड़कियों को या तो आपात स्थिति में सहायता दी गई है। कहीं मानव तस्करी से बचाया गया या ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में असुरक्षित परिस्थितियों में मदद की गई है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि महिलाओं के लिए ट्रेनों में सुरक्षित यात्रा को बढ़ावा देने के लिए आरपीएफ की 25 सदस्यीय टीम ने आज दिल्ली हाफ मैराथन 2023 में भाग लिया।
इसमें कहा गया है कि 2023 में, आरपीएफ कर्मियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 862 महिलाओं को चलती ट्रेनों के पास खतरनाक परिस्थितियों से बचाया। मंत्रालय ने कहा कि 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत, उन्होंने स्टेशनों और ट्रेनों में खतरे में पड़ी 2,898 लड़कियों को भी बचाया है, जिससे उन्हें नुकसान होने से बचाया जा सके।
इसके अलावा, उन्होंने 51 नाबालिग लड़कियों और छह महिलाओं को मानव तस्करों के चंगुल से बचाया है। आरपीएफ महिला कर्मियों ने 130 माताओं की डिलीवरी में सहायता की है, जिन्हें ट्रेन यात्रा के दौरान प्रसव पीड़ा हुई थी।
दरअसल, भारत के विशाल रेलवे नेटवर्क में आरपीएफ की महिला कर्मी 'मेरी सहेली' टीम में काम करती हैं। यह टीम लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले यात्रा करने वाली अनगिनत महिलाओं को सहायता और सुरक्षा प्रदान करती हैं और ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।