रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि ट्रेन यात्रियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारतीय रेलवे 650 से 700 करोड़ के पूर्व-कोविड यात्री यातायात को छू लेगा।
मंत्री ने सोशल मीडिया पर कुछ रिपोर्टों और टिप्पणियों का जोरदार खंडन करते हुए कहा कि ट्रेन यात्रियों की संख्या 2010 की तुलना में आधी हो गई है। उन्होंने कहा कि कोविड लॉकडाउन के बाद, भारतीय रेलवे ने दिसंबर 2021 से अपनी ट्रेन सेवाएं शुरू कीं और जुलाई 2022 तक परिचालन सामान्य हो गया था। इसके अलावा उन्होंने उन रिपोर्ट को भी खारिज किया कि गैर-एसी कोच या स्लीपर क्लास कोच की संख्या कम कर दी गई है।
1,500 किलोमीटर रूट पर लगाया गया 'कवच' सिस्टम
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वदेश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' 1,500 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर पूरी तरह से स्थापित की गई है। बुधवार को कहा, इसके कवरेज को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
वैष्णव ने कहा, कि हमने 2016 में कवच प्रणाली के साथ अपनी यात्रा शुरू की और 2020 तक इसका प्रायोगिक कार्य, परीक्षण, संशोधन और संस्करण संवर्द्धन किया गया। 2022 की शुरुआत में इसका उत्पादन और स्थापना बड़े पैमाने पर शुरू हुई।
उन्होंने कहा, 'आज हमने 1,500 किलोमीटर लंबे मार्ग पर इस सुरक्षा प्रणाली को स्थापित कर लिया है। मुंबई-हावड़ा और दिल्ली-हावड़ा मार्ग के 3,000 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर भी (इसकी स्थापना की दिशा में) महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
हाथियों की मौत रोकने के लिए लगेगी एआई-आधारित निगरानी प्रणाली
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि रेल पटरियों पर हाथियों की मौत को रोकने के लिए वन क्षेत्रों से गुजरने वाले 700 किलोमीटर मार्ग पर एआई-आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि हमने असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, झारखंड और छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में वन क्षेत्रों की पहचान की है, जो हाथियों का घर हैं। इन क्षेत्रों में कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। यह प्रणाली ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी के बारे में लोको पायलटों को समय रहते सचेत कर सकेगी।
मंत्री के अनुसार, रेलवे ने कुछ स्टार्ट-अप के सहयोग से विकसित की गई तकनीक को पिछले साल असम में 150 किलोमीटर रूट पर परखा था और यह काफी उपयोगी साबित हुई है।