कोयला, डीजल और बिजली के बाद अब भारतीय रेलवे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। ट्रेनों के डिब्बों को अलग रूप देकर उसे यात्रियों की सुविधानुसार बनाया जा रहा है। देशभर की अधिकांश ट्रेनों के कोचों में सोलर पैनल लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यात्री डिब्बों में पंखे और लाइट चलाने के लिए बिजली की बजाए अब सौर ऊर्जा तकनीक की मदद ली जा रही है।
रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, पैसेंजर ट्रेनों के कोच में लाइट और पंखों के लिए बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। अभी तक 60 डिब्बों में सौर पैनल लगाए गए हैं। इनमें दिल्ली के शकूर बस्ती स्थित 14 डेमू ट्रेलर कोच, बिहार के जमालपुर में 6 डेमू ट्रेलर कोच में, तमिलनाडु जन शताब्दी एक्सप्रेस 12084-83 के 7 नॉन एसी कोच में, स्वच्छता एक्सप्रेस दिल्ली के 10 पैसेंजर कोच में और लखनऊ से वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस के 10 नॉन एसी पैसेंजर कोच में सोलर पैनल लगाए गए हैं।
इसके अलावा आईआरएफसी के सीएआर फंडिग के तहत उत्तर प्रदेश के सीतापुर (सीतापुर-दिल्ली-रेवाड़ी रेलवे सेक्शन) में 13 नॉन एसी यात्री कोच में बिजली की बजाए सौर तकनीक का प्रयोग इन ट्रेनों के कोच में किया जा रहा है।
जल्द ही उत्तर प्रदेश के मथुरा-अलवर रेल सेक्शन में 10 नॉन एसी कोच और लखनऊ-वाराणसी रेल सेक्शन में 30 नॉन एसी कोच को सौर ऊर्जा तकनीक से लैस किया जाएगा।
गौरतलब है कि जुलाई 2017 में भारतीय रेलवे ने पहली सोलर एनर्जी डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट) ट्रेन दिल्ली के सराय रोहिला से गुरुग्राम के फारुख नगर तक शुरू की है। वहीं भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक खुद को ग्रीन रेलवे में पूरी तरह से बदलने का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए रेलवे कई पहल कर रहा है। रेलवे ने दिसंबर 2023 तक सभी ब्रॉड गेज रूटों का इलेक्ट्रिफिकेशन करने का एलान किया है। रेलवे ने 900 स्टेशनों समेत अपनी अलग-अलग इमारतों की छतों पर 100 मेगावाट क्षमता वाले सौर पैनल लगाए गए हैं।