प्रवासी मजदूरों को उनके गृह प्रदेश पहुंचाने में रेलवे मददगार साबित हो रहा है। अभी तक 44 लाख से भी अधिक मजदूर विभिन्न राज्यों से अपने मूल राज्य रेल से सफर करके पहुंच गए है। 25 दिनों में रेलवे श्रमिकों के लिए 3274 स्पेशल ट्रेन का संचालन कर चुकी है। हालांकि श्रमिक ट्रेन को लेकर जमकर राजनीति भी चल रही है। इस बीच स्पेशल ट्रेन की लेटलतीफी की खबरें भी सामने आ रही हैं, जहां सफर करने वाले मजदूरों का आरोप है कि इसके कारण उन्हें घंटों तक भूखे-प्यासे सफर करना पड़ रहा है। हालांकि, रेलवे ने दावा किया है कि 44 लाख यात्रा करने वाले मजदूरों को 74 लाख मिल मुफ्त बांटा गया है।
इसके साथ ही यात्रा करने वाले मजदूरों को आईआरसीटीसी की तरफ से एक करोड़ लीटर पानी यानी एक करोड़ लीटर रेल नीर दिया गया। रेलवे का कहना है कि पिछले तीन दिनों में एक भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन परिवर्तित रूट से नहीं चली है। भूख-प्यास से किसी मजदूर की मौत नहीं हुई। हालांकि, यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि मजदूरों की मौत कैसे हुई।