फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Railways: गर्भवती लोको पायलटों को हल्की ड्यूटी देने से बोर्ड का इनकार, कहा- अवकाश सुविधाओं का प्रावधान है

Wed, 31 Jul 2024 05:07 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गर्भवती लोको पायलटों को हल्की ड्यूटी देने से रेलवे बोर्ड ने इनकार कर दिया है। बोर्ड कहा है कि पहले से ही अवकाश सुविधाओं का प्रावधान है।
विज्ञापन
हेरिटेज ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 फ्रंटलाइन गर्भवती महिला कर्मचारियों को हल्के या ऑफिस काम में ट्रांसफर करने के अनुरोध को रेलवे बोर्ड ने खारिज कर दिया है।
विज्ञापन


रेलवे बोर्ड ने 25 जुलाई को एक पत्र में कहा है कि गर्भवती महिला लोको पायलटों की गर्भावस्था के दौरान उनके लिए अवकाश सुविधाओं का प्रावधान पहले से ही किया गया है। ड्यूटी के दौरान गर्भपात का सामना करने वाली महिला लोको पायलटों के एक समूह ने रेलवे बोर्ड के समक्ष अपनी समस्या हल करने के लिए रेलवे ट्रेड यूनियन से संपर्क किया था।

ट्रेड यूनियन ने यह मामला रेलवे बोर्ड से 2 और 3 मई को हुई बैठक में उठाया था। फेडरेशन ने महिला लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की ओर से गर्भावस्था के दौरान हल्की ड्यूटी पर तैनाती की मांग की थी। हालांकि, बोर्ड ने अपने अंतिम निर्णय में इस अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि रेलवे नियमों में पर्याप्त छुट्टियों का प्रावधान है। 
विज्ञापन

 

मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 का दिया था हवाला
महिला कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड से अपील की थी कि गर्भावस्था के दौरान महिला फ्रंटलाइन कर्मियों को हल्की या स्थिर नौकरियों में स्थानांतरित करने के दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 का हवाला दिया था। पत्र में कहा गया था कि यह अधिनियम नियोक्ता को किसी भी गर्भवती महिला को मुश्किल कामों में शामिल करने से रोकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुश्किल काम करने से महिला कर्मचारी की गर्भावस्था में परेशानी हो सकती है। 

विज्ञापन


मुश्किल होता है महिला लोको पायलट का काम
एक महिला लोको पायलट का कहना था कि रेलवे अधिनियम में लोको पायलट के काम को कठिन काम के रूप में अधिसूचित किया गया है। अधिनियम की धारा चार में साफ तौर पर बताया गया है कि महिला कर्मचारियों को कठिन काम करने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि कठोर परिस्थितियों की वजह से उन्हें कई बार गर्भपात का सामना करना पड़ा।

एक अन्य महिला लोको पायलट का कहना था कि इंजन कैब में प्रवेश करना ही अपने आप में एक मुश्किल काम है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंजन कैब की सीढ़ी के हैंडल की ऊंचाई जमीन से लगभग छह फीट है। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर इंजन कैब में चढ़ना और उतरना आसान है लेकिन रेलवे यार्ड या बाहर के इलाकों में यह काम बेहद मुश्किल है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें