केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भारतीय रेलवे की खानपान इकाई आईआरसीटीसी को एक आरटीआई अर्जी पर जानकारी देने से मना करने पर नए निर्देश दिए हैं। इस अर्जी में रेलवे के टेंडर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए थे।
क्या था आरटीआई में?
अर्जी में यह सवाल किया गया था कि क्या रेलवे टेंडर के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों ने 'रेल नीर घोटाले' और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के बारे में खुलासा किया था। आवेदक यह जानना चाहता था कि क्या इन कंपनियों ने टेंडर दस्तावेजों में अपने खिलाफ चल रहे सीबीआई (CBI) या प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों का साफ जिक्र किया था।
रेल नीर घोटाला और नुकसान
रेल नीर से जुड़ा कथित घोटाला साल 2015 में सामने आया था। इसकी जांच सीबीआई ने की थी। आरोप है कि निजी कंपनियों ने राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में 'रेल नीर' की जगह सस्ता बोतलबंद पानी सप्लाई किया था। इस धोखाधड़ी से रेलवे को करीब 19.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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कंपनियों की पारदर्शिता पर सवाल
आरटीआई में विशेष रूप से पूछा गया था कि क्या बोली लगाने वाली कंपनियों ने छापेमारी, नकदी की जब्ती और कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी थी। इस आरटीआई का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि सरकारी टेंडर लेते समय कंपनियां कितनी पारदर्शी थीं।
आईआरसीटीसी ने इस वजह से किया इनकार
आईआरसीटीसी ने आरटीआई कानून की धारा 8(डी) का हवाला देते हुए आंकड़े देने से मना कर दिया था। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने इसे जनहित का मामला बताया। केंद्रीय सूचना आयोग ने पाया कि आईआरसीटीसी का जवाब नाकाफी था। आयोग ने कहा कि सिर्फ किसी धारा का नाम बता देना काफी नहीं है, बल्कि जानकारी न देने का ठोस कारण और आधार भी बताना जरूरी है। आयोग ने आईआरसीटीसी से कहा कि वह आरटीआई अर्जी को नए सिरे से देखे। साथ ही मांगी गई जानकारी पर नया और तर्कसंगत जवाब दे।
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