पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस शनिवार शाम हादसे का शिकार हो गई। इसमें 23 लोगों की मौत हो गई जबकि 80 से अधिक लोग घायल हो गए। मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसे को लेकर रेल मंत्री सुरेश प्रभु काफी सख्त नजर आ रहे हैं। रेल हादसे के बाद चौतरफा हमलों से घिरे सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (सीआरबी) को शाम तक जांच करके यह तय करने के लिए कहा है कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है ? वहीं दूसरी तरफ इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट किया है कि बोर्ड के द्वारा की जा रही कार्यवाही में नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीआरबी को आज शाम तक प्रथम दृष्टया सबूत के आधार पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है ?
Will not allow laxity in operations by the Board. Have directed CRB to fix responsibility on prima facie evidence by end of day.
— Suresh Prabhu (@sureshpprabhu) August 20, 2017
ताजा जानकारी के मुताबिक मुजफ्फरनगर रेल हादसे में अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 A (लापरवाही के हुई मौत) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
#UtkalExpressDerailment: Case registered against unknown persons under various sections including 304 A of IPC (death due to negligence) pic.twitter.com/zJ5deHfj44
— ANI UP (@ANINewsUP) August 20, 2017
इससे पहले सुरेश प्रभु ने मुजफ्फरनगर रेल हादसे को लेकर ट्वीट करते हुए बताया कि रिस्टोरेशन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता वाला है। इसके अलावा घायल लोगों के लिए हर संभव चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।
Restoration is top priority.7 coaches tackled. Also ensuring best possible medical care for the injured. Monitoring situation closely.
— Suresh Prabhu (@sureshpprabhu) August 20, 2017
हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश
खतौली में ट्रेन हादसे के बाद शनिवार रात में मौके पर पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। वहीं, रेलवे के अफसर पूरे मामले को दबाने में लगे रहे। अफसरों ने रेल राज्यमंत्री और अन्य नेताओं को भी गुमराह किया और उस टूटी हुई पटरी को नहीं दिखाया, जिसे इस बड़े और गंभीर हादसे की वजह माना जा रहा है।
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मोदी सरकार ने नहीं उठाया कोई ठोस कदम
बुलेट ट्रेन की बात करने वाली मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में अब तक दर्जनभर से अधिक बड़े रेल हादसे हो चुके हैं, जिसमें सैंकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि हजारों लोग घायल हो गए। लेकिन ट्रेन हादसों को रोकने के लिए सरकार के द्वारा न ही अब तक कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई।