भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा दावा किया है। रेलवे ने लोकसभा में बताया कि पिछले 10 वर्षों में रेल दुर्घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। सुरक्षा पर बढ़े निवेश और नई तकनीकों के इस्तेमाल का असर अब आंकड़ों में भी दिख रहा है।
रेलवे ने बताया कि, 2014-15 में 135 रेल दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं। जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 16 रह गई। वहीं, 2026-27 के चालू वित्त वर्ष में जून तक सिर्फ दो रेल दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। सरकार का कहना है कि रेलवे में सुरक्षा बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। बेहतर ट्रैक, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और स्वदेशी कवच तकनीक समेत कई सुरक्षा उपायों को तेजी से लागू किया गया है। इन कदमों की वजह से दुर्घटनाओं में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे का कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स भी लगातार बेहतर हुआ है। यह सूचकांक प्रति 10 लाख ट्रेन किलोमीटर पर होने वाली दुर्घटनाओं को दर्शाता है। 2014-15 में यह 0.11 था। जो 2025-26 में घटकर 0.01 रह गया। यानी इस पैमाने पर भी करीब 91% की कमी दर्ज की गई है। सरकार के मुताबिक, रेलवे में सुरक्षा मजबूत करने के लिए निवेश में लगातार बढ़ोतरी की गई है। 2013-14 में सुरक्षा कार्यों पर 39,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2026-27 के बजट में यह राशि बढ़ाकर 1,20,389 करोड़ रुपये कर दी गई है। रेल मंत्रालय का कहना है कि यह राशि रेल पटरियों के उन्नयन, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, पुलों के सुधार, इंटरलॉकिंग सिस्टम और अन्य सुरक्षा परियोजनाओं पर खर्च की जा रही है, ताकि रेल संचालन को और सुरक्षित बनाया जा सके।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, देशभर के 6,671 रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इन सभी स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे ट्रेनों का संचालन और सुरक्षित हो सके। इसके अलावा 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेट को भी इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे ट्रेन और सड़क यातायात के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। रेल मंत्रालय ने बताया कि सभी लोकोमोटिव (इंजन) में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए जा चुके हैं। वहीं, कोहरे वाले इलाकों में लोको पायलटों को जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि कम दृश्यता के दौरान भी ट्रेनों का संचालन सुरक्षित रह सके। इसके अलावा, इलेक्ट्रिफाइड रेल मार्गों पर सिग्नलों से पहले रेट्रो रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं। इनकी मदद से घने कोहरे में भी लोको पायलटों को आगे आने वाले सिग्नल की समय पर जानकारी मिल जाती है, जिससे सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होता है।