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ED: यूपी में मुखौटा आईटी कंपनियों पर रेड, 135 बैंक खाते फ्रीज, अपराध की आय के 391  करोड़ रुपये जब्त, दुबई भागे

Wed, 16 Jul 2025 10:17 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ स्थित तीन संदिग्ध मुखौटा कंपनियों - मेसर्स किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों पर ईडी ने छापेमारी की है।
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ स्थित तीन संदिग्ध मुखौटा कंपनियों - मेसर्स किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों पर ईडी ने रेड की है। तलाशी अभियान के दौरान  बरामद साक्ष्यों और विभिन्न बैंकों से प्राप्त पुष्टियों के आधार पर, ईडी ने इन संस्थाओं से जुड़े 135 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। चल रही जांच के तहत कुल 204 करोड़ रुपये की अपराध आय (पीओसी) को भी फ्रीज कर दिया गया है।
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यह जब्ती फरवरी 2025 से चल रही पिछली तलाशियों के क्रम में है। तब कुल 52 बैंक खातों को फ्रीज किया गया था, जिनकी कुल पीओसी 187 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार, अब तक 391 करोड़ रुपये की पीओसी फ्रीज की जा चुकी है। इन कंपनियों का संचालन नकली निदेशकों द्वारा किया जा रहा है। ये कंपनियां आरबीआई द्वारा विनियमित हुए बिना बिल भुगतान समाधान, यूपीआई एप्लिकेशन और इसी तरह की सेवाएं प्रदान करने वाली आईटी फर्मों के रूप में प्रस्तुत हो रही हैं। 

मूलतः, ये कंपनियां करोड़ों रुपये के क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स ऑनलाइन फॉरेक्स और एमएलएम (मल्टी-लेवल मार्केटिंग) घोटाले से उत्पन्न आपराधिक आय को वैध बनाने के लिए मध्यस्थ चैनलों के रूप में काम करती हैं। इन कंपनियों ने पूरे भारत में हजारों निवेशकों को ठगा है। एजेंट अपने बैंक खाते या दूसरों के बैंक खाते में नकदी या धन एकत्र करते हैं और फिर पहले बताए गए खातों के माध्यम से धन को रूट करते हैं। इसलिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये कंपनियां कभी-कभी निवेश माध्यमों के पहले स्तर के रूप में काम करती हैं जहां निवेशक सीधे अपना पैसा निवेश करते हैं। अन्य समय में, वे मध्यस्थ लॉन्ड्रिंग संस्थाओं के रूप में भी काम करती हैं, जिनका उपयोग निवेशकों के धन के बड़े हिस्से को रूट करने और डंप करने के लिए किया जाता है। इसके ज़रिए धन के निशानों को छिपाना है और अपराध की आय को परत दर परत बाहर लाना है।
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तलाशी के दौरान कई डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं। पूरी धन-राशि का पता लगाने और अपराध की आय को वैध बनाने में शामिल सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करने के लिए उनकी फोरेंसिक जाँच की जा रही है। मुख्य मास्टरमाइंड - नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र सूद, विनीत कुमार और संतोष कुमार, हज़ारों निर्दोष निवेशकों को ठगने के बाद दुबई भाग गए हैं। तलाशी के दौरान, विश्वसनीय रूप से पता चला कि उपरोक्त व्यक्ति भारत में अपने सहयोगियों के माध्यम से, अपनी एमएलएम योजनाओं के तहत विभिन्न निर्दोष निवेशकों को ठगने और पीओसी को वैध बनाने का काम जारी रखे हुए हैं।
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