भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि यूपीए शासनकाल में उनके पूर्व सहयोगी को रक्षा ऑफसेट कांट्रैक्ट मिले थे। शनिवार को इसपर पलटवार करते हुए राहुल ने कहा कि वह जांच के लिए तैयार हैं। ठीक इसी समय गांधी ने एनडीए सरकार द्वारा किए गए 59,000 करोड़ के कांट्रैक्ट की भी जांच कराए जाने की बात कही।
एक प्रेस कांफ्रेंस में गांधी ने कहा, 'कृपया कोई भी जांच शुरू करें। आप जैसी जांच करना चाहते हैं करें। मैं तैयार हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है लेकिन राफेल की भी जांच कीजिए।' बिजनेस टुडे मैग्जीन में छपे एक लेख के अनुसार गांधी की ब्रिटिश कंपनी बैकऑप्स लिमिटेड ने यूपीए शासन के दौरान रक्षा ऑफसेट का अधिग्रहण किया था।
ब्रिटिश कंपनी बैकऑप्स में उलरिक मैकनाइट 35 प्रतिशत के मालिक थे जबकि गांधी के पास 65 फीसदी की हिस्सेदारी थी। यह कंपनी 2003 में बनाई गई थी और 2009 में इसे बंद कर दिया गया। मैकनाइट ने बाद में फ्रेंच डिफेंस सप्लायर नेवल ग्रुप स्कोरपेने सबमरींस के खिलाफ ऑफसेट कांट्रैक्ट हासिल किया था।
मैग्जीन के लेख ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का हथियार दे दिया है क्योंकि राहुल लगातार एनडीए पर राफेल सौदे में घोटाला करने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका आरोप है कि विमानों को तीन गुना ज्यादा कीमत पर खरीदा जा रहा है और अनिल अंबानी को इसका ठेका दिलवाया गया। रक्षा ऑफसेट में विदेशी कंपनी को एक निश्चित अनुपात में भारत की किसी कंपनी के साथ कांट्रैक्ट करना होता है।
शनिवार को एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा, 'आज मैंने पढ़ा कि यूपीए के शासन में एक नामदार के बिजनेस पार्टनर को रक्षा ऑफसेट कांट्रैक्ट मिले थे। अपनी सरकार, दोस्त भी अपना और रक्षा सौदा भी बड़ा। यानी नामदार के लिए मलाई का पूरा इंतजाम था।'