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Rahul Gandhi: संघ नेता ने क्यों की राहुल गांधी की प्रशंसा, क्या भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बदल रही RSS की राय?

सार

Rahul Gandhi: संघ परिवार के जानकार मानते हैं कि आरएसएस या विहिप के सभी कार्यक्रम राष्ट्र और भारतीय संस्कृति को जोड़ने को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। यही उनका मूल एजेंडा है। ऐसे में संघ परिवार ऐसे किसी कार्यक्रम का विरोध नहीं कर सकता, जो राष्ट्र या भारतीय संस्कृति को जोड़ने की बात करता हो...
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Bharat Jodo Yatra- Pujari Satyendra Das, Rahul gandhi and champat rai - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के शीर्ष नेता चंपत राय ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की भारत जोड़ो यात्रा की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा है कि एक नौजवान सर्दी के मौसम में पैदल चलकर देश का भ्रमण कर रहा है। यह स्वागत योग्य है। चूंकि, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने भी यात्रा की प्रशंसा की है, और इसके पहले अयोध्या में रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भी भारत जोड़ो यात्रा के लिए राहुल गांधी को शुभकामनाएं दी थीं, विहिप नेता के बयान को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन बड़ा प्रश्न है कि संघ परिवार के रुख में इस बदलाव के क्या मायने हैं और इसे किस दृष्टि से देखा जाना चाहिए?

विश्व हिंदू परिषद ने चंपत राय के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय बताकर इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। स्वयं चंपत राय ने भी कहा है कि भारत जोड़ो यात्रा पर किसी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा की आरएसएस या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई आलोचना नहीं की है, इसलिए यात्रा को लेकर उनके रुख में बदलाव जैसी कोई बात नहीं है।

संघ के मूल एजेंडे से मेल खाती है यात्रा

संघ परिवार के जानकार मानते हैं कि आरएसएस या विहिप के सभी कार्यक्रम राष्ट्र और भारतीय संस्कृति को जोड़ने को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। यही उनका मूल एजेंडा है। ऐसे में संघ परिवार ऐसे किसी कार्यक्रम का विरोध नहीं कर सकता, जो राष्ट्र या भारतीय संस्कृति को जोड़ने की बात करता हो। चूंकि, राहुल गांधी अपनी यात्रा से भारत जोड़ो की बात ही कर रहे हैं, संघ परिवार उनकी यात्रा का सैद्धांतिक तौर पर विरोध नहीं कर सकता।

मोहन भागवत ने भी कही थी ये बात

संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान आरएसएस की आधिकारिक राय के तौर पर देखी जाती है। मोहन भागवत ने हाल ही में यह बात कही है कि संघ परिवार का भाजपा को समर्थन बिना शर्त नहीं है। वे भाजपा का समर्थन केवल इसलिए करते हैं क्योंकि वह राष्ट्र और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात करता है। उन्होंने कहा था कि यदि दूसरे राजनीतिक दल (कांग्रेस के संदर्भ में) भी राष्ट्र या भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात करें तो संघ परिवार उनका भी समर्थन करने के लिए तैयार है।

आरएसएस के वरिष्ठ नेता राम माधव ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में कुछ इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि संघ परिवार अपने स्वयंसेवकों (कार्यकर्ताओं) को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रशिक्षित करता है। इसके बाद वह किसी भी पार्टी या संगठन से जुड़ने और कोई भी कार्य करने के लिए स्वतंत्र रहता है। यदि दूसरे राजनीतिक दल (कांग्रेस के संदर्भ में) हमारे कार्यकर्ताओं को उनके मूल विचारों के साथ अपनाने को तैयार हों, तो संघ उन्हें भी कार्यकर्ता उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के कार्यकर्ता किसी राजनीतिक दल विशेष (भाजपा) से जुड़ने के लिए बाध्य नहीं हैं।

संघ के लिए एजेंडा प्रमुख

संघ नेताओं के इस बयान से यह स्पष्ट हो जाता है कि संघ के लिए उसका कोर एजेंडा सर्वोपरि है। वह भाजपा के समर्थन और कांग्रेस से दूरी के लिए बाध्य नहीं है। जो कोई भी दल या संगठन उसके एजेंडे के अनुसार चलने के लिए आगे आएंगे, संघ परिवार का उन्हें समर्थन मिल सकता है। राहुल गांधी की यात्रा पर विहिप नेता चंपत राय की टिप्पणी को इस अर्थ में देखा जा सकता है। 

एसी कमरों से निकलने के लिए बाध्य हुए दूसरे राजनीतिक दल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े राजीव तुली ने अमर उजाला से कहा कि चंपत राय एक संत का जीवन जीते हैं। किसी संत से किसी मुद्दे पर राय पूछी जाती है तो वे अक्सर उसकी प्रशंसा ही करते हैं। चंपत राय की टिप्पणी को किसी अलग संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने संत स्वभाव में ही राहुल गांधी की यात्रा को एक सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। संघ नेता ने कहा कि देश ने देखा है कि अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने एसी कमरों में बैठकर जनता के हितों की बात किया करते थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आने के बाद यह पहली बार हुआ है कि दूसरे दलों के नेताओं को सड़कों पर उतरकर जनता का हाल देखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आए इस बदलाव का स्वागत किया जाना चाहिए।

कश्मीर में शांति के कारण ही राहुल की यात्रा संभव

राजीव तुली ने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा कश्मीर तक पहुंचने वाली है। यह केवल इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार के विकासवादी एजेंडे के कारण कश्मीर में विकास हुआ है और वहां आतंकी घटनाओं में कमी आई है। यदि कश्मीर का माहौल 90 के दशक की तरह तनावपूर्ण होता और वहां आतंकी घटनाएं ज्यादा हो रही होतीं, तो राहुल गांधी अपनी यात्रा को कश्मीर तक ले जाने की बात सोच भी नहीं पाते। संघ नेता ने कहा कि राहुल गांधी को कश्मीर में शांति लाने के लिए और उनकी यात्रा के कश्मीर तक पहुंचने लायक माहौल बनाने के लिए पीएम मोदी की सरकार की प्रशंसा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके पहले 90 के दशक में भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कश्मीर तक तिरंगा यात्रा निकाली थी। लेकिन कश्मीर में स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण उन्हें कश्मीर तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। उनकी यात्रा को रामबन में ही रोक लिया गया। मुरली मनोहर जोशी के कश्मीर जाने पर अड़ने के बाद केवल चार-पांच लोगों को हेलीकॉप्टर से कश्मीर ले जाकर यात्रा का समापन कराया गया। उन्होंने कहा कि आज यदि राहुल गांधी अपने सभी समर्थकों के साथ कश्मीर तक जाने की बात सोच पा रहे हैं, तो केवल इसलिए क्योंकि वहां शांति है। उन्हें इसके लिए वर्तमान सरकार को धन्यवाद देना चाहिए।

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