नीट पेपर लीक, सीबीएसई मार्किंग और कक्षा 9वीं में नई भाषा नीति को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय को 'आपदाओं का विभाग' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी से बच्चों से माफी मांगने और शिक्षा मंत्री को तुरंत पद से हटाने की मांग की है।
देश की शिक्षा व्यवस्था और नीट पेपर लीक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आड़े हाथों लिया है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार के फैसलों ने देश के करोड़ों युवाओं और बच्चों के भविष्य को गहरी अनिश्चितता में धकेल दिया है। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय को 'आपदाओं का विभाग' बताया है।
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तीन परीक्षाओं में बड़ी नाकामियों के आरोप
राहुल गांधी ने तीन अलग-अलग आयु वर्ग के छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों के बारे में बात की है। उन्होंने कहा कि इन गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
नीट परीक्षा का संकट: राहुल गांधी के अनुसार, नीट-यूजी परीक्षा में हुए पेपर लीक ने देश के 22 लाख से अधिक छात्रों को प्रभावित किया है। इस बड़ी गड़बड़ी के बाद परीक्षा रद्द होने से छात्रों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।
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सीबीएसई 12वीं की मार्किंग: उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीएसई कक्षा 12वीं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पूरी तरह से दोषपूर्ण रही है। इसके कारण कई होनहार छात्रों को उम्मीद से बहुत कम अंक मिले हैं और वे कॉलेज में दाखिले की पात्रता खो चुके हैं।
कक्षा 9वीं पर नया नियम: राहुल गांधी ने कक्षा 9वीं के लाखों छात्रों पर अचानक लागू किए गए तीन-भाषा फॉर्मूले की भी आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि बिना शिक्षकों और बिना नई किताबों के एक जुलाई से यह नियम थोप दिया गया है। 14 साल के बच्चों को विकल्प के तौर पर कक्षा छह की किताबें दी जा रही हैं, जिसे उन्होंने एक बेहद खराब प्रशासनिक व्यवस्था बताया।
शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी और पीएम से माफी की मांग
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर एक आयु वर्ग के छात्रों को संभालने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर #SackPradhan अभियान का समर्थन करते हुए सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया कि क्या वे इस प्रशासनिक विफलता के लिए देश के लाखों प्रभावित बच्चों से माफी मांगेंगे?