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वायनाड से शुरू हुई राहुल गांधी की नई राजनीति, कर रहे हैं इन दिक्कतों का सामना

Sun, 18 Aug 2019 12:21 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद राहुल गांधी ने कलपेट्टा और मुक्कम में अपने दो नए कार्यालय खोले हैं। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने अपने करीबी केबी बायजू को दी है। वायनाड से 49 साल के राहुल ने अपने राजनीतिक जीवन की नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने 25 मई को लोकसभा चुनाव में करारी हार का जिम्मा लेते हुए पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 10 अगस्त को उनकी मां सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है। 

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राहुल को उनके गढ़ अमेठी में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हराया है। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था जिसमें अमेठी और वायनाड शामिल थे। वायनाड ने जहां उन्हें जीत का स्वाद चखाया वहीं अमेठी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राहुल के कार्यालयों का औपचारिक तौर पर उद्घाटन होना था लेकिन आठ अगस्त को वायनाड के बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आने की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।

कांग्रेस ने जब सोनिया को अपने अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर चुना उसी दिन राहुल के इस्तीफे को भी स्वीकार किया गया। मगर वायनाड के बाढ़ से प्रभावित होने के कारण उन्हें इस्तीफा स्वीकार होने से पहले अपने संसदीय क्षेत्र जाना पड़ा। जहां उन्होंने लोगों से मुलाकात की। वीडियो में दिख रहा है कि लोगों से बात करते हुए राहुल को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यह संसदीय क्षेत्र नेहरू-गांधी परिवार से इतर है।
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राहुल वायनाड के लोगों और उनकी स्थानीय भाषा से बिलकुल भी परिचित नहीं है। हालांकि कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कोई समस्या नहीं है। कांग्रेस पदाधिकारियों ने बताया कि कैसे राहुल गांधी ने चुंदेल के एक शिविर में निवासियों के साथ आराम से बातचीत की और जिलाधिकारी को यह बात समझाने में सक्षम रहे कि विस्थापित निवासी वापस अपने घर जाना चाहते हैं। 

सड़के बर्बाद हो चुकी हैं इसलिए उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से कहा कि वह उनकी मरम्मत कर दें। दिल्ली से वायनाड की दूरी 2,460 किलोमीटर की है। केरल सरकार ने उन्हें कुछ दिन वायनाड से दूर रहने के लिए कहा था ताकि उनकी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए जा सके। मगर ऐसे बहुत से लोग है जिनका मानना है कि गांधी ने बाढ़ पर काफी देर बाद प्रतिक्रिया दी और यदि वह ऐसे ही करेंगे तो वायनाड अमेठी के कदमों पर चल सकता है।

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