ऐसा लगता नहीं है कि राफेल सौदे का जिन्न जल्द ही सरकार का पीछा छोड़ने वाला है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने इसे मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बना रखा है और वह कहीं पर भी इसका जिक्र करना नहीं भूलती है। केवल इतना ही नहीं कांग्रेस चुनाव में इसे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की बात कही थी। इसके लिए उन्होंने भाजपा को 24 घंटे का समय दिया था।
गुरुवार को इस मामले पर एक बार फिर राहुल ने सरकार पर हमला किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'प्रिय मिस्टर जेटली, आपके पास राफेल मुद्दे पर जेपीसी गठित करने के लिए 6 घंटे से भी कम समय की डेडलाइन बची हुई है। युवा भारत इंतजार कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि आप मोदी जी और अनिल अंबानी जी को यह समझाने में व्यस्त होंगे की आखिर क्यों उन्हें आपको सुनना चाहिए और इसे मंजूरी देनी चाहिए।'
बता दें कि राहुल द्वारा बुधवार को दिए 24 घंटे के समय की डेडलाइन का जवाब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया था। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, '24 घंटों का इंतजार क्यों करें जब आपके पास अपनी खुद की जेपीसी- झूठी कांग्रेस पार्टी है। आपने देश को गुमराह किया। दिल्ली, कर्नाटक, रायपुर, हैदराबाद, जयपुर और संसद में राफेल विमान की अलग-अलग कीमतें बताईं। देश के लोगों का आईक्यू आपसे ज्यादा है।'
राफेल सौदे पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, 'हमने 2007 के समझौते को बदलकर नया सौदा किया। इसके अनुसार, हमने हथियारों से लैस विमान का सौदा किया। इसके आधार पर बेसिक विमान की कीमत में 9 प्रतिशत और हथियारों से लैस विमान की कीमत में 20 प्रतिशत की कमी हुई है। राफेल डील फ्रांस सरकार और भारत सरकार के बीच में हुई है। हम उनसे 36 राफेल विमान खरीदेंगे। इसमें किसी तासरी पार्टी का कोई रोल नहीं है।'