कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीएजी रिपोर्ट में कथित देरी पर सवाल उठाए हैं। राहुल ने एक ट्वीट में ‘केज्ड’ शब्द के साथ एक तालिका भी पोस्ट की, जिसमें 2011-12 से अब तक ऑडिट के लिए लिए गए वक्त को दर्शाया गया है।
उस तालिका के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए सीएजी ने 12 से 18 और 18 से 24 महीने में रिपोर्ट तैयार की या वो अब तक लंबित हैं। राहुल ने हालांकि उस तालिका का स्रोत नहीं बताया। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले पांच वर्षों में देश के सर्वोच्च ऑडिट संस्था द्वारा रिपोर्ट की संख्या में काफी कमी आई है।
बता दें, प्रदेश के दर्जनों विभागों का आलम यह है कि सरकार से सहायता अनुदान लेने के बावजूद खर्च का हिसाब नहीं दे रहे हैं। 31 मार्च 2019 को अनुदान संबंधित 23,832 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब यानी उपभोग प्रमाणपत्र (यूसी) विभागों को दे देना था। यह खुलासा सीएजी की वित्तीय वर्ष 2018-19 से संबंधित वित्त लेखे खंड-एक की रिपोर्ट से हुआ है। इसे मंगलवार को विधान परिषद के पटल पर रखा गया। वर्षों पूर्व दिए गए अनुदान का हिसाब-किताब नहीं दिए जाने से अनुदान के गलत उपभोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।